विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

गांवों में जाकर शोध करें AMU के विद्यार्थी, समस्याओं के समाधान पर हो काम: जस्टिस सत्यवीर सिंह

By Digital Desk Edited By: Prateek Gupta
Published: Sat, 17 Oct 2026 02:58 PM (IST)

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह ने एएमयू के छात्रों से गांवों में जाकर समाज की वास्तविक समस्याओं पर शोध ...और पढ़ें

News Article Hero Image

जागरण संवाददाता, अलीगढ़। शोध केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम न बने, बल्कि समाज की वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके समाधान का रास्ता भी दिखाए। एएमयू के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को गांवों में जाकर लोगों के जीवन, उनकी चुनौतियों और जरूरतों का अध्ययन करना चाहिए।

महिलाओं व बालिकाओं की स्थिति, गरीबी और सामाजिक भेदभाव जैसे विषयों पर मौलिक शोध से समाज में बदलाव की राह तैयार हो सकती है। यह बात इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जस्टिस सत्यवीर सिंह ने सर सैयद दिवस समारोह में कही।

उन्होंने कहा कि भारत की बड़ी आबादी गांवों में रहती है। ऐसे में देश की वास्तविक परिस्थितियों को समझने के लिए शोधार्थियों का ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचना जरूरी है। उन्हें गांवों में जाकर देखना चाहिए कि महिलाएं और बालिकाएं किन परिस्थितियों में जीवन बिता रही हैं, गरीब परिवारों के सामने क्या चुनौतियां हैं और समाज में किस तरह का भेदभाव मौजूद है।

इन विषयों पर केवल पुस्तकों के आधार पर नहीं, बल्कि जमीनी अनुभवों के आधार पर शोध किया जाना चाहिए। जस्टिस सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालयों में होने वाला शोध समाज से जुड़ा होना चाहिए। शोधार्थी अपनी थीसिस के लिए ऐसे विषय चुनें, जिनसे आम लोगों की समस्याएं सामने आएं और उनके समाधान के लिए उपयोगी सुझाव मिल सकें।

समाज की वास्तविक जरूरतों को समझे बिना किया गया शोध अपने व्यापक उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि देश की कमियों को दूर करने में शिक्षित वर्ग की अहम भूमिका है और शोधार्थियों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।

शिक्षा से वंचितों को मिले अवसर

उन्होंने एएमयू से गरीब और वंचित वर्गों के बच्चों के लिए शिक्षा व आवास की सुविधाएं बढ़ाने की भी अपील की। कहा कि शिक्षा लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाती है और उनमें आत्मविश्वास पैदा करती है। सर सैयद अहमद खां ने भी शिक्षा को सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाया था। उनके प्रयासों का उद्देश्य ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना था।

न्यायमूर्ति ने ज्ञान को आम लोगों की समझ से जोड़ने पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा और शोध का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। महिलाओं, गरीबों और वंचितों की स्थिति में सुधार के बिना देश की प्रगति अधूरी है। एएमयू जैसे संस्थानों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अपने ज्ञान का उपयोग इन चुनौतियों को समझने और दूर करने में करना चाहिए।