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अलीगढ़ (जेएनएन)।  ढाई साल की मासूम के साथ दरिंदगी  की तस्वीर आज हर आंखों में जैसे मानों तैर रही है। टप्पल की बिटिया की जिस निर्ममता के साथ हत्या की गई, उसे सुनकर हर कोई सिहर उठता है, अंदर से कलेजा कांप उठता है। बेटियों के लिए भय सताने लगता है कि वह कहीं भी महफूज नहीं हैं। बड़ा सवाल भी उठता है, दिल्ली की दामिनी, उन्नाव कांड, कठुआ और टप्पल कांड जैसी देश में न जाने कितनी घटनाएं होती रहेंगी? आखिर क्यों नहीं रुकती ऐसी घटनाएं? दैनिक जागरण ने शुक्रवार को टप्पल की मासूम बिटिया के साथ जघन्य अपराध विषय पर पाठक पैनल आयोजित किया। लब्बोलुआब यही था कि कठोर कानून न होने से ऐसी घटनाएं हो रही हैं। ऐसे मामलों में सख्त से सख्त सजा होनी चाहिए, जिससे घटना को अंजाम देने से पहले अपराधी सौ बार सोचने को मजबूर हो।

दैनिक जागरण कार्यालय में हुआ पाठक पैनल का आयोजन

तालानगरी स्थित दैनिक जागरण के कार्यालय में पाठक पैनल में संपादकीय प्रभारी अवधेश माहेश्वरी ने भूमिका रखी। उन्होंने कहा, टप्पल में बिटिया के साथ घटना से पूरा देश आहत है। ऐसी घटनाएं आखिर क्यों नहीं रुक रही हैं? जीवन हॉस्पिटल की निदेशक व वरिष्ठ स्त्री-प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या चौधरी ने महर्षि अरविंद घोष के एक सूक्त वाक्य से शुरुआत की। महर्षि ने कहा कि देश-धर्म का उद्धार करने से पहले अपनी आत्मा का उद्धार करो, उसका शुद्धिकरण करो, फिर देश-धर्म का उद्धार कर सकते हो। सच में ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों की आत्मा मर जाती है। ये पाशविक हैं।  संपादकीय प्रभारी ने कहा, क्या पुलिस की लापरवाही रही है? डॉ. दिव्या चौधरी ने कहा कि पुलिस को ऐसे मामलों में मानवीयता और सक्रियता दोनों दिखानी चाहिए, कई बार ऐसा नहीं होता है।

कठोर कदम उठाने की है जरूरत

मशहूर शायरा रेहाना शाहीन ने कहा, आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। कठोर कदम न उठाए जाने से ऐसे अपराध होते रहते हैं। समाजसेवी स्नेहा शर्मा ने कहा कि यह नारी जाति का अपमान है। आखिर ऐसे माहौल में कौन मां बेटी को जन्म देना चाहेगी? न्याय में देरी होना भी एक अपराध है। इसलिए अपराधियों को ऐसी घटना को अंजाम देने में भय नहीं लगता है। समाजसेवी रश्मि सिंह ने कहा कि ऐसे मामलों में भी पुलिस की निष्क्रियता सबसे बड़ा अपराध है। जिस दिन से बच्ची गायब थी यदि उसी दिन से पुलिस सक्रिय हो जाती तो शायद वह बच भी सकती थी। मुझे ये समझ में नहीं आता कि ऐसे मामलों पर भी पुलिस की आत्मा क्यों नहीं जागती है?

माता-पिता भी समझें अपनी जिम्मेदारी

वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. दिव्या लहरी ने कहा कि नेशनल क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट के अनुसार बेटियों के साथ ऐसी घटनाओं में अधिकतर परिवार के सदस्यों की संलिप्तता रहती है। हम अपनी संस्कृति और अध्यात्म से दूर होते जा रहे हैं। इसलिए लोगों के अंदर रिश्ते-नाते का कोई मोल नहीं रहा। साथ ही माता-पिता को भी अपनी जिम्मेदारियां समझनी होगी, वह बच्चों पर निगाह रखें। इसी बीच डॉ. दिव्या चौधरी बोल पड़ीं। कहा, यदि हम अध्यात्म से जुड़े रहे तो निश्चित इस तरह के अपराध नहीं होंगे। प्रतिभा राघव ने अपनी बात बेबाकी से रखी। कहा, हम पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ रहे हैं। उनकी बुरी चीजें ले रहे हैं, अच्छी चीजों को छोड़ रहे हैं। इसलिए समाज में संस्कार खत्म होते जा रहे हैं। हमें अपनी धर्म और संस्कृति से जुड़े रहना होगा, वरना सामाजिक विकृतियां इतनी बढ़ जाएंगी कि उसे कोई रोक नहीं सकेगा। विजयलक्ष्मी ने कहा कि समाज में परिवर्तन भी आया है। हम दूसरों के बच्चे को गलत रास्ते पर जाने पर यदि टोकते हैं, तो उनके माता-पिता बचाव में आ जाते हैं।

समाज में भय खत्म हो गया

आर्ट ऑफ लिविंग की पूनम सिंह ने कहा कि समाज में भय खत्म हो गया है। अपराध करने वाले अच्छी तरह से जानते हैं कि उन्हें कोई फांसी तो होने वाली नहीं है, इसलिए वो ऐसी घटनाएं करते जाते हैं। पूनम ने कहा कि ध्यान, प्राणायाम बच्चों को कराएं, जिससे उनके अंदर संस्कार आएगा। नीहार मीरा नेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रधानाचार्य कल्पलता चंद्रहास ने कहा कि ऐसी घटना को अंजाम देने वाले सही मायने में मानव के रूप में दानव हैं। इस तरह की घटना को अंजाम देने वाले दङ्क्षरदों के साथ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। इसी बीच समाजसेवी बबीता रानी बोल पड़ीं। कहा, कानून का किसी में भय नहीं है। इसलिए ऐसी घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।

 

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Posted By: Mukesh Chaturvedi

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