अलीगढ़, जेएनएन । रिहायशी इलाकों में औद्याेगिक इकाईयां संचालित न होने दी जाएं, सुप्रीम कोर्ट के भी यही आदेश हैं। अब सवाल उठता है कि ऐसी औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई कौन करे? मामला सीधा प्रदूषण से जुड़ा है तो कार्रवाई भी प्रदूषण नियंत्रण विभाग को करनी चाहिए। लेकिन, कार्रवाई का ठीकरा विभाग एडीए पर फोड़ रहा है। विभाग के अपने तर्क हैं। रेलवे स्टेशन के निकट मोहल्ला मधुपुरा के मामले में प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने पत्र में स्पष्ट लिखा कि नियमानुसार कार्रवाई एडीए को करनी चाहिए। पलटवार करते हुए एडीए ने कहा कि पहले प्रदूषण नियंत्रण विभाग जांच करे, जांच रिपोर्ट के आधार पर ही एडीए कार्रवाई करेगा।
28 अगस्त, 2019 को की गयी थी शिकायत
दरअसल, बन्नादेवी क्षेत्र की फायर ब्रिगेड कालोनी निवासी अविनाश सिंह ने मोहल्ला मधुपुरा में संचालित कारखानों के संबंध में 28 अगस्त, 2019 को एक शिकायत प्रदूषण नियंत्रण विभाग में की थी। इसमें कहा कि आबादी में कारखाने हर तरह का प्रदूषण फैला रहे हैं। जहरीला केमिकल नालियों में बहता है। मशीनों की तेज आवाज और धुंए से स्थानीय लोग काफी परेशान हैं। नियमानुसार इन औद्योगिक इकाइयाें को तालानगरी में शिफ्ट कराना चाहिए। 20 अगस्त को वह सिविल लाइंस पुलिस से भी शिकायत कर चुके हैं। लेकिन, पुलिस ने हाथ खड़े कर लिए। प्रदूषण विभाग में शिकायत की मामला नगर निगम का बता दिया।
निगम ने पल्ला झाड़ा
निगम ने प्रदूषण विभाग को पत्र लिखकर स्पष्ट कहा कि प्रकरण उनके क्षेत्राधिकार में हैं। आवेदक फिर प्रदूषण बोर्ड को लिखा। 19 मार्च, 2021 को मुख्य पर्यावरण अधिकारी ने नियमों का हलावा देकर डीएम काे लिखे पत्र में कहा कि एडीए को निर्देशित कर कार्रवाई कराई जाए। लेकिन कुछ हुआ नहीं। आवेदक ने अपील की, तब 17 अप्रैल को मुख्य पर्यावरण अधिकारी ने डीएम को फिर पत्र लिखकर कहा कि छह माह में एडीए ने संंबंधित प्रकरण में कोई कार्रवाई नहीं की है। एडीए को प्रकरण में कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएं। अब इसके जवाब में एडीए के अधिशासी अभियंता ने आवेदक को भेजे अपने पत्र में कहा है कि मधुपुरा में घरों में निकिल पालिस आदि का कार्य पूर्व से होता रहा है। इसका परीक्षण प्रदूषण बोर्ड द्वारा किया जाना है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के परीक्षण के उपरांत परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई किया जाना संभव है। इस संबंध में आवेदक को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से ही पत्राचार करना होगा। यानी, डेढ़ साल में ये तक नहीं हो सका कि कौन सा विभाग कार्रवाई करेगा।






न्यूज़
मरीज
अस्पताल
दवाएँ
बाजार
पुलिस












a