जासं, अलीगढ़ : मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत छात्राओं को उनकी शिक्षा पूरी करने के लिए आर्थिक रूप से सहायता दी जाती है। माध्यमिक कालेजों में पढ़ रही छात्राएं अगर इस योजना के लाभ से वंचित रहीं तो इसके लिए संबंधित कालेज के प्रधानाचार्य जवाबदेह होंगे। सोमवार को इस संबंध में डीआइओएस डा. धर्मेद्र कुमार शर्मा ने नौरंगीलाल राजकीय इंटर कालेज में प्रधानाचार्यो के साथ बैठक कर निर्देश जारी किए हैं।

डीआइओएस ने बताया कि प्रधानाचार्य अन्य विद्यालयों से संपर्क कर पात्र छात्राओं का चिह्नीकरण करेंगे। साथ ही उन छात्राओं का आनलाइन आवेदन भी करवाएंगे। इसके लिए नोडल प्रभारियों की टीम भी तैयार कर दी गई है। उन्होंने बताया कि कक्षा एक व छह में बालिका के प्रवेश के बाद 2000 रुपये एक मुश्त दिए जाते हैं। इसी तरह कक्षा नौ में प्रवेश के बाद 3000 रुपये और 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद स्नातक या दो वर्षीय या उससे अधिक अवधि के डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश के बाद 5000 रुपये एक मुश्त दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि इसके लिए वे परिवार ही पात्र हैं, जो उत्तर प्रदेश के निवासी हों व उनका स्थायी निवास प्रमाणपत्र हो। पारिवारिक आय अधिकतम तीन लाख रुपये सालाना हो। किसी परिवार की अधिकतम दो बालिकाओं को ही योजना का लाभ मिलेगा। परिवार में अधिकतम दो बच्चे हों। किसी महिला को द्वितीय प्रसव से जुड़वा बच्चे होने पर तीसरी संतान लड़की है तो उसको लाभ मिलेगा। अगर किसी महिला को पहले प्रसव में बालिका हो और दूसरे प्रसव में जुड़वा दो बेटियां हों तो केवल ऐसी स्थिति में ही तीनों बेटियों को लाभ मिलेगा। अगर किसी परिवार ने अनाथ बालिका को गोद लिया हो तो परिवार की जैविक संतानों व विधिक रूप से गोद ली गई संतानों को शामिल करते हुए अधिकतम दो बालिकाओं को ही लाभ मिलेगा। इससे ज्यादा हैं तो वे लाभ से वंचित रह जाएंगी।

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