मनोज जादौन, अलीगढ़ ।  जिले के ग्र्रामीण इलाकों में  औद्योगिक वातावरण तैयार करने का सपना एक बार फिर टूटता नजर आ रहा है। वर्षों पहले स्थापित किए गए तीन मिनी औद्योगिक आस्थानों के कुल 106 प्लाटों पर अब तक एक भी फैक्ट्री संचालित नहीं हो सकी। जवां के कारोबारियों ने तो सुविधाओं का बहाना बना कई प्लाटों पर फैक्ट्री की वजाय मकान बना दिए। खैर में कारोबार के लिए कोई रुचि नहीं दिखाई गई। अतरौली में प्लाटों पर बने कई शेड में परिवार रह रहे हैं। इन्हें नोटिस जारी कर जिला उद्योग व प्रोत्साहन विभाग ने उद्योगों की स्थापना न करने के संबंध में जवाब मांगा है। इस तरह के नोटिस खैर में पूर्व में ही दिए जा चुके है। जवाब न मिलने के चलते विभाग  सभी आवंटन रद करने पर विचार कर रहा है।

यह होना था

तीनों औद्योगिक आस्थानों में कृषि संबंधित यंत्र उद्योग जैसे थ्रेसर, कटर, कल्टीवेटर, वेल्डिंग मशीन से निर्मित जंगला, दरवाजा व अन्य बिल्डिंग मैटेरियल, ट्रॉली, लुहार संबधी तांबा, लोहे की परात, कुल्हाड़ी आदि बनाने के कारखाने विकसित करने की योजना थी, जिसके जमीन पर न उतरने से क्षेत्र के बेरोजगारों को भी झटका लगा है।

जवां के लिए 1.22 करोड़ मंजूर

जवां में अलीगढ़-अनूपशहर रोड पर औद्योगिक आस्थान की स्थापना 2006 में की गई। यहां 40 प्लॉट हैं, जिनका तभी आवंटन हो गया था। अब इस क्षेत्र को विकसित करने के लिए 1.22 करोड़ रुपये सरकार से मंजूर हुए हैं। अक्टूबर तक यह पैसा रिलीज हो जाएगा। इस राशि से चार दीवारी, सड़क व बिजली की व्यवस्था की जानी है। यह सुविधा न होना ही फैक्ट्री न लगाने का बड़ा कारण बताया जा रहा है। शुरू में सुविधाओं के लिए प्रयास भी किए गए, लेकिन बाद में छह चार प्लाटों पर मकान बना लिए गए। 36 अभी खाली पड़े हैं। प्लॉटों के ऊपर होकर बिजली की हाईटेंशन लाइन गुजर रही हैं। इनकी चपेट में आकर सात साल पहले भवन निर्माण के दौरान लेंटर डालते में राजमिस्त्री व श्रमिकों की मौत भी हो गई थी।

खैर में 38 प्लाट खाली,  अतरौली में शेड में ही रहने लगे परिवार

खैर में अलीगढ़-खैर मार्ग, निकट तहसील मुख्यालय पर 2016 में मिनी औद्योगिक आस्थान स्थापित किया गया। सुविधाएं होने के बाद भी उद्योग स्थापित नहीं हो सके। सभी 38 प्लांट खाली पड़े हैं। 1985 में स्थापित अतरौली मिनी औद्योगिक आस्थान में 28 प्लॉट आवंटित किए गए।  यहां 200 से एक हजार वर्गमीटर के प्लाट हैं। 10 शेड हैं। कई शेड में परिवार रहने लगे हैं।

 

Posted By: Mukesh Chaturvedi

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