अलीगढ़ (जेएनएन)। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) छात्रसंघ के अध्यक्ष सलमान इम्तियाज के  कन्हैया कुमार के प्रचार में शामिल होने पर खड़ा हुआ विवाद कुलपति यानि यूनियन के संरक्षक प्रो. तारिक मंसूर के पास पहुंच गया है। उपाध्यक्ष ने कथित रूप से जीबीएम (छात्रों की आम सभा) में छात्रसंघ अध्यक्ष के खिलाफ पास हुए अविश्वास प्रस्ताव को कुलपति के पास भेज दिया है। अब कुलपति को तय करना है कि जीबीएम वैध थी या अवैध। इसके बाद ही कुलपति आगे कोई फैसला लेंगे।

प्रस्ताव पर उठे सवाल
अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सबसे बड़ा सवाल जीबीएम की वैधता को लेकर ही उठ रहा है। सचिव हुजैफा आमिर अपनी बात पर अडिग हैं कि प्रस्ताव पास ही नहीं हुआ। वहीं उपाध्यक्ष हम्जा सूफियान विधिवत रूप से प्रस्ताव को पास हुआ बता रहे हैं। बिहार की बेगूसराय सीट पर चुनाव मैदान में उतरे कन्हैया कुमार का प्रचार में एएमयू से शिक्षक व छात्र बढ़कर कर हिस्सा ले रहे हैं। छात्रसंघ अध्यक्ष सलमान इम्तियाज भी 24 अप्रैल की रात बेगूसराय रवाना हो गए थे।

छात्रों के दो गुटों में हुई थी मारपीट
छात्रसंघ उपाध्यक्ष हम्जा सूफियान ने अध्यक्ष द्वारा बिना बताए किसी राजनीतिक पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करने पर आपत्ति जताई। उपाध्यक्ष ने दूसरे दिन ही सचिव की अनुपस्थित में एग्जीक्यूटिव की बैठक बुलाई और शाम को जीबीएम बुला दी। जिसमें दो गुटों में मारपीट व फायङ्क्षरग हो गई। दोनों ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है। सबकी नजर जीबीएम में अध्यक्ष के खिलाफ कथित रूप से पास हुए अविश्वास प्रस्ताव पर थी। जिसे उपाध्यक्ष ने शनिवार को कुलपति को भेज दिया। प्रस्ताव पर निर्णय लेने से पहले कुलपति इसकी जांच कराएंगे जीबीएम वैध थी या अवैध। इसके लिए वह उपाध्यक्ष, सचिव व कैबिनेट मेंबर्स बात कर सकते हैं।

सवाल उठना लाजिमी
छात्रसंघ के कोषाध्यक्ष नफीस अंसारी का कहना है कि उपाध्यक्ष ने प्रस्ताव को कुलपति के पास भेज दिया है। जीबीएम वैध है या अवैध वीसी तय करेंगे। यूनियन की परंपरा रही है कि पद पर रहते हैं कोई पदाधिकारी किसी पार्टी का विरोध और सपोर्ट नहीं कर कसता। अध्यक्ष अगर प्रेस के जरिए बताकर जाते हैं कि वह किसी राजनीति पार्टी को सपोर्ट करने जा रहे हैं तो तब तो सवाल उठना लाजिमी था। 

गलती करने वाले को मिले मौका
छात्रसंघ के सचिव हुजैफा आमिर का कहना है कि जो गलती करता है उसे मौका दिया जाता है, अपनी बात रखने का। उसकी गैर मौजूदगी में प्रस्ताव पास नहीं हो सकता। प्रस्ताव पर चर्चा होने से पहले ही झगड़ा हो गया था। इस लिए मैं वहां से चला गया। मेरे सामने कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ। जीबीएम ही अवैध थी। जीबीएम बुलाने का अधिकार उपाध्यक्ष के पास नहीं हैं क्योंकि अध्यक्ष उन्हें चार्ज देकर नहीं गए थे।

कुलपति को भेजा प्रस्ताव
छात्रसंघ के उपाध्यक्ष हम्जा सूफियान का कहना है कि सचिव जीबीएम छोड़कर चले गए थे, इस लिए उन्हें प्रस्ताव के बारे में पता ही नहीं हैं। प्रस्ताव के लिए 71 छात्रों का हस्ताक्षर जरूरी होते हैं, 107 ने हस्ताक्षर किए थे। अध्यक्ष की अनुपस्थित में कार्यवाहक उपाध्यक्ष ही जीबीएम बुला सकता है। प्रस्ताव कुलपति को भेज दिया है।

मुलायम संग मंच साझा करने पर बुलाई थी जीबीएम
2012 में छात्र संघ के अध्यक्ष सैयद शारिक ने नुमाइश मैदान में सभा करने आए पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के साथ मंच साझा किया था। तब छात्रों ने जीबीएम बुलाई थी। इस बैठक में सैयद शारिक ने सफाई दी थी कि वह छह सूत्रीय मांग पत्र को लेकर मुलायम सिंह से मिले थे। जिसमें मुस्लिमों को 18 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग शामिल थी। सपा ने इसका वायदा भी किया था।

राहुल के रोड शो में  नहीं हुए थे शामिल
2007 के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जब अलीगढ़ आए थे तब उन्होंने छात्रसंघ के तब के सचिव सुलेमान मोहम्मद खान को मिलने के लिए एक होटल में बुलाया था। सचिव से कंाग्रेस के साथ जुडऩे की भी बात कही थी। उस यूनियन के उपाध्यक्ष रहे माजिन जैदी ने बताया कि सचिव ने यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि वह यूनियन के पदाधिकारी हैं। पद पर रहते हुए किसी पार्टी से जुड़ नहीं सकते।

छात्रसंघ अध्यक्ष की कुर्सी पर किसकी है नजर
छात्र यूनियन में जिस तरह दो फाड़ हुए हैं उससे सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अध्यक्ष की कुर्सी पर किसकी नजर है। जिस दिन जीबीएम बुलाई गई थी। उस दिन बाहरी युवकों ने बवाल कराया था। इन युवकों को यूनियन हॉल में घुसने की अनुमति किसने दी यूनियन के पदाधिकारियों को इसकी तह तक में जाना होगा। अब जबकि एक महीने का ही कार्यकाल बाकी है, ऐसे में किसकी नज अध्यक्ष की कुर्सी पर है?

ये भी जानें
- यूनियन के संविधान में किसी भी पदाधिकारी को कहीं जाने से रोकने का कोई प्रावधान नहीं हैं
- कोई पदाधिकारी अगर प्रेस वार्ता करके किसी पार्टी के विरोध या पक्ष में जाता है तो वह यूनियन का ईशू होता
- किसी भी मीटिंग के लिए नोटिस सचिव द्वारा ही निकाला जा सकता है
- उपाध्यक्ष ने सचिव की अनुपस्थिति में एग्जीक्यूटिव की बैठक बुलाई थी
- जिसके खिलाफ प्रस्ताव लाया जाता है उसे भी अपना पक्ष रखने का मौका मिलता है।