अलीगढ़: रात्रि के समय सड़क दुर्घटना व अन्य घायलों को उपचार के लिए नवनिर्मित जसरथपुर ट्रामा सेंटर लेकर जाना महंगा पड़ सकता है। वजह, यहां से आपको पुन: बिना उपचार के ही मरीज को लेकर दूसरी जगह दौड़ना पड़ेगा। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग ने ट्रामा सेंटर को भले ही चालू घोषित कर दिया हो, मगर यहां रात्रिकालीन सुविधाएं उपलब्ध नहीं। शाम ढलते ही ट्रामा सेंटर पर ताला लटक जाता है।

ढाई करोड़ से भवन, स्टाफ न उपकरण: अकराबाद के गाव जसरथपुर में करीब डेढ़ साल पहले 2.52 करोड़ रुपये की लागत से ट्रामा सेंटर का निर्माण पूरा हुआ। अब यहां सिविल सर्जन, एनेस्थेटिस्ट, ऑर्थोपेडिक सर्जन, न्यूरो सर्जन समेत कई डॉक्टर, पैरामेडिकल और सहयोगी स्टाफ की जरूरत है। एक्स-रे, थ्री डी अल्ट्रासाउंड मशीन, सीटी स्कैन, ओटी सीलिंग लाइट, पैरामॉनिटर के साथ एनेस्थीसिया मशीन, वेंटीलेटर, ट्रांसपोर्ट वेंटीलेटर, एबीजी मशीन, डेफिब्रिलेटर मॉनिटर, पावर ड्रिल, स्पलिंट, ट्रैक्शन व कम से कम पाच बेड की रिकवरी यूनिट होनी चाहिए। अफसोस, विशेषज्ञ व अन्य स्टाफ की नियुक्ति और उपकरण आज तक नहीं भेजे गए और न विभाग को ही बजट दिया। मुख्यमंत्री पिछले साल ही अलीगढ़ के अन्य योजनाओं के साथ इस ट्रामा सेंटर के इस भवन का लोकार्पण कर चुके हैं।

सात बजे तक स्टाफ की ड्यूटी: जून 2017 में लोकार्पण के बाद से लोगों की नजर ट्रामा सेंटर पर थी। शासन से कोई पहल न होने पर सीएमओ ने कुछ माह पूर्व आनन-फानन दो एमबीबीएस डॉक्टर व अन्य स्टाफ भेजकर मरहम पंट्टी का काम शुरू कर दिया है, मगर वह भी सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक ही। उपकरण न होने से यहां प्राथमिक उपचार ही हो पाता है। रात के समय तो वह भी नहीं। वजह, विभाग के पास पर्याप्त संसाधन ही नहीं हैं। मरीजों की सुविधा के मद्देनजर फिलहाल दो डॉक्टर व अन्य स्टाफ की नियुक्ति की है। शासन से बजट नहीं मिला है। लोकल बजट से ही कुछ उपकरण खरीदने पर विचार कर रहे हैं।

- डॉ. एमएल अग्रवाल, सीएमओ

Posted By: Jagran

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