आकाश राज सिंह, हाथरस । Nari Shakti : इरादे बुलंद हों और सफलता मिलना तय है। आशा ठाकुर ने इसे साबित किया है। पहले कठिन परिश्रम से खुद को स्वावलंबी बनाया। अब दूसरी महिलाओं का संबल बनी हुई हैं। जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार देकर उनकी जिंदगी में खुशियां भरने का कार्य रही हैं। जलेसर रोड के बर्फखाना के पास रहने वाली आशा महिलाओं को free training के साथ रोजगार देकर उनके लिए आशा की किरण बन गई हैं।

परिवार के तानों ने मजबूत किए इरादे

मथुरा जिले में टैंटीगांव के पास लोहई निवासी लाल सिंह व उनकी पत्नी कुसुमलता ने अपनी पुत्री आशा को अच्छे संस्कार दिए थे जिसके चलते वे शुरू से समाजसेवा के प्रति लगाव रखती थीं। हालांकि उनकी शिक्षा हाईस्कूल तक ही हो पाई मगर यह उनके विकास में बाधा नहीं बनी। वर्ष 1996 में उनका विवाह हाथरस में जलेसर रोड निवासी राजकुमार सिंह के साथ हुआ। परिवार में मिले तानों ने उनके स्वावलंबी बनने के इरादों को और मजबूत कर दिया।

प्रशिक्षण लेकर खड़ा किया रोजगार

आशा बताती हैं कि उन्होंने प्रशिक्षण लेकर सिलाई, कढ़ाई का काम शुरू कर दिया। पति का सहयोग मिला तो उन्होंने इस कारोबार को आगे बढ़ाया। वह पर्दे, तकिया के कवर, बेडशीट बनाने लगीं। उनके मन में समाजसेवा प्रबल हुई तो जलेसर रोड, ओढ़पुरा, चामड़गेट सहित आसपास के कई इलाकों की जरूरतमंद महिलाओं व लड़कियों को अपने घर पर free training देकर उन्हें भी रोजगार से जोड़ना शुरू किया।

25 महिलाओं को दे रहीं रोजगार

आशा बताती हैं कि जरूरतमंद व गरीब महिलाओं को सिलाई व कढ़ाई का प्रशिक्षण निश्शुल्क देने लगीं। यह प्रशिक्षण दस दिन में पूरा होने के बाद कपड़े भी सिलाई के लिए दिया करती थीं। उन्होंने बताया कि दीपा, चंचल, आरती, अंजू, रचना, कृष्णा सहित करीब 25 महिलाओं को उन्होंने सिलाई मशीन दिलवाकर घर पर ही काम करने का मौका दिया। इससे उन्हें घर परिवार संभालने के साथ आय का एक श्रोत भी मिल गया।

घरों को टूटने से बचा रहीं आशा

आशा बताती हैं कि उन्होंने इस मुकाम तक आने में काफी संघर्ष झेले हैं। अभी तक वह पांच सौ से अधिक महिलाओं व लड़कियों को निश्शुल्क प्रशिक्षण दे चुकी हैं। यह कारवां आगे भी चलता रहेगा। इसके अलावा वह परिवार में हो रहे विवादों को भी समझौते के माध्यम से सुलझाने का कार्य कर रही हैं। वह बताती हैं कि बिना भेदभाव के गरीब कन्याओं की शादियां भी वह जनसहयोग से कराने का कार्य कर रही हैं।

प्रतिक्रिया

मेरा मानना है कि अपने लिए तो सभी करते हैं, जो दूसरों के जीवन में खुशहाली लाने का कार्य करे वही सच्चा इंसान है। समाजसेवा मेरा कोई शौक नहीं, यह मेरा लक्ष्य था। मुझे खुशी है कि मैं अपने परिवार के साथ दूसरों के परिवार में बिना किसी भेदभाव के खुशी लाने का कार्य कर रही हूं। इससे मुझे खुशी मिलती है।

-आशा ठाकुर

Edited By: Anil Kushwaha

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