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अलीगढ़ (जेएनएन)। चंद्रयान-2 अभियान में जिले के वैज्ञानिक निर्भय कुमार उपाध्याय का भी योगदान है। निर्भय व उनकी टीम ने 'रंभा पेलोड तैयार किया था, जिसे लैंडर विक्रम के साथ भेजा गया है। चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग के बाद पेलोड एक्टिव किया जाना था, लेकिन संपर्क टूटने के कारण मायूसी है। अब उनकी टीम विक्रम से संपक के इंतजार में है।

चंदपा के हैं रहने वाले

चंदपा के गांव मीतई के रहने निर्भय कुमार उपाध्याय सितंबर 2008 से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) में काम कर रहे हैं। वे बतौर वैज्ञानिक वहां कार्यरत हैं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) से एमटेक करने के बाद वे एएमयू में ही असिस्टेंट प्रोफेसर रहे। इसके बाद ङ्क्षहदुस्तान कॉलेज में पढ़ाया। वहीं से उनका सलेक्शन इसरो में हो गया।

पिता हैं किसान

निर्भय के पिता रामकुमार उपाध्याय किसान हैं। परिवार में दो भाई हैं। बड़े भाई वरुन गांव में ही रहते हैं। वरुन के अनुसार उनके भाई रंभा पेलोड के प्रोजेक्ट मैनेजर हैं। चंद्रयान-2 अभियान के अंतर्गत 13 पेलोड भेजे गए हैं, जो चंद्रमा की उत्पत्ति एवं विकास के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे। ऑर्बिटर के साथ आठ, लैंडर में तीन व रोवर में दो पेलोड लगाए गए थे। निर्भय का पेलोड लैंडर में लगा है। निर्भय उपाध्याय के एक टीवी इंटरव्यू के अनुसार उन्होंने 'रंभा पेलोड मैकेनिकल सिस्टम पर काम किया है। इस पेलोड को चंद्रमा की उत्पत्ति की खोज के लिए बनाया गया है।

टीम है परेशान

सॉफ्ट लैंडिंग के बाद इस उपकरण को लैंडिंग एरिया के निकट चंद्रमा की सतह की जानकारी एकत्रित करनी थी। इस स्टडी को 'इओनोस्फेर नियर लूनर सरफेस प्लाजमा नाम दिया गया है। विक्रम से संपर्क टूटने के कारण पेलोड एक्टिवेट नहीं किया जा सका है। इससे निर्भय व उनकी टीम परेशान है, लेकिन संपर्क टूटने के बाद विक्रम की थर्मल इमेज ने उम्मीद बरकरार रखी है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही विक्रम से संपर्क होगा। निर्भय विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में भी प्रोजेक्ट मैनेजर रह चुके हैं। वे मंगल यान मिशन में शामिल रहे थे तथा उसके लिए उन्हें गोल्ड मेडल मिला था।

Posted By: Mukesh Chaturvedi

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