हाथरस, जागरण संवाददाता। बसों में खिड़की व शीशों पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बसों में यात्रियों को ठंड से बचाने के लिए जरूरी इंतजाम नहीं हैं। टूटी खिड़की व शीशों के ही बसों में यात्रियों को ठिठुरते हुए यात्रा करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उपकरणों का अभाव बताकर अधिकारी भी पल्ला झाड़ रहे हैं।

सबसे अलग है हाथरस डिपों के बसों की स्‍थिति

हाथरस डिपो की बसों की स्थिति सबसे अलग है। यहां किराया सब के बराबर चाहिए। वहीं सुविधाओं के नाम पर यात्रियों को कुछ नहीं मिलता। मूलभूत सुविधाओं तक से यात्रियों को वंचित किया जा रहा है। सर्दियां शुरू हुए काफी दिन हो चुके हैं। उसके बाद भी बसों को दुरस्त नहीं किया जा सका है। सर्दियों से बचने के लिया यात्रियों कोई सुविधा नहीं दी गई है। बेचारे यात्रियों को ठिठुरते हुए यात्रा करने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है।

खिड़कियों से झकझौर देती है सर्द हवाएं

रोडवेज की व्यवस्थाओं में अभी तक सुधार नहीं हैं। कड़कड़ाती ठंड में भी करीब 20 बसें एेसी हैं जिनमें खिड़की व शीशे टूटे हुए हैं। इन बसों में खिड़कियों पर शीशा तक नहीं हैं। इसके चलते यात्रियों को बसों में ठिठुरते हुए यात्रा करनी पड़ रही है। सबसे अधिक परेशानी यात्रियों को सुबह व रात्रि के समय हो रही है। बसों में शीशे के साथ सीटें तक टूटी हुई हैं।

अलाव की भी नहीं व्यवस्था

रोडवेज बस स्टैंड पर बसों का संचालन सुबह चार बजे से ही हो जाता है। यात्रियों का आवागमन भी शुरू हो जाता है। यहां सुबह व रात्रि के समय यहां अलाव की भी कोई व्यवस्था नहीं है। सर्दियों में लोग ठिठुरते हुए बसों का इंतजार करते हैं। यात्रियों की माने तो रोडवेज कर्मी कार्यालय में हीटरों पर तापते रहते हैं। वहीं यात्रियों के लिए कोई व्यवस्था नहीं हैं।

इनका कहना है

बसों में खिड़की व शीशे दुरस्त रखने के निर्देश कर्मचारियों को दिए गए हैं। बिना शीशे व खिड़कियों का बसों को सर्दियों में ले जाने की इजाजत नहीं हैं।

- शशीरानी, एआरएम

Edited By: Anil Kushwaha