ग्रेटर अलीगढ़: पहले राउंड में अलॉट होंगे 700 प्लॉट, टाउनशिप की लांचिंग का रास्ता जल्द होगा साफ
खैर रोड पर विकसित हो रहे ग्रेटर अलीगढ़ योजना के लेआउट को जल्द ही एडीए बोर्ड की बैठक में मंजूरी ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। खैर रोड पर ट्रांसपोर्ट नगर के सामने विकसित किए जा रहे ग्रेटर अलीगढ़ को धरातल पर उतारने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। गुरुवार को कमिश्नरी में मंडलायुक्त संगीता सिंह की अध्यक्षता में प्रस्तावित अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) की 91वीं बोर्ड बैठक में योजना के लेआउट को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसके बाद योजना के विकास कार्यों में तेजी आएगी।
पहले चरण में 700 आवासीय व व्यावसायिक भूखंड लाटरी के माध्यम से आवंटित किए जाएंगे, जबकि दूसरे चरण में करीब 800 भूखंडों का आवंटन नीलामी प्रक्रिया से किया जाएगा। बैठक का प्रस्तावित एजेंडा मंगलवार को बोर्ड सदस्यों को भेजा गया है।
इसमें ग्रेटर अलीगढ़ योजना के लेआउट के साथ भूमि खरीद की दर निर्धारित करने, भू-उपयोग परिवर्तन व योजना में निजी विश्वविद्यालयों के लिए भूमि उपलब्ध कराने समेत कई अहम प्रस्ताव शामिल हैं।
खैर रोड पर सात गांवों की करीब 323 हेक्टेयर भूमि में ग्रेटर अलीगढ़ विकसित किया जा रहा है। इसे आधुनिक शहर की तर्ज पर बसाने की योजना है। पहले चरण में करीब 70 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जाएगा। यहां 700 से अधिक छोटे-बड़े आवासीय और व्यावसायिक भूखंड तैयार किए जाएंगे।
योजना के लेआउट में चौड़ी सड़कें, पार्क, ग्रीन बेल्ट, खेल सुविधाएं, जलापूर्ति, ड्रेनेज व अन्य आधुनिक आधारभूत सुविधाओं को शामिल किया गया है। नई भवन उपविधि-2025 के अनुरूप तैयार किए जा रहे लेआउट में मुख्य सड़क 45 मीटर चौड़ी होगी, जबकि विभिन्न सेक्टरों को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग 12 मीटर चौड़े प्रस्तावित हैं।
योजना के बीच सेंटर प्वाइंट विकसित किया जाएगा। इसके आसपास व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भूखंड आरक्षित रहेंगे। पार्क, खेल मैदान व सार्वजनिक उपयोग की अन्य सुविधाओं का भी प्रावधान किया गया है।
700 करोड़ की योजना, 500 करोड़ मुआवजा बांटा
ग्रेटर अलीगढ़ परियोजना की अनुमानित लागत करीब 700 करोड़ रुपये है। इसमें प्रदेश सरकार की ओर से 350 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जा चुके हैं, जबकि शेष धनराशि एडीए अपने संसाधनों से खर्च करेगा। सितंबर 2023 से किसानों की सहमति के आधार पर भूमि खरीद की प्रक्रिया शुरू हुई थी। अब तक करीब 250 हेक्टेयर भूमि एडीए के कब्जे में आ चुकी है।
इसमें लगभग 230 हेक्टेयर किसानों से खरीदी गई है, जबकि करीब 20 हेक्टेयर सरकारी भूमि का पुनर्ग्रहण किया गया है। किसानों को अब तक करीब 500 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है।
