हाथरस, जेएनएन।  जनपद में आयकर रिटर्न भरने और आयकर देने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले पांच साल में 30 हजार संख्या बढ़ी है। अब 50 हजार का आंकड़ा पहुंच गया है। जनपद के आयकरदाता 20 करोड़ रुपये हर साल विभाग को देते हैं। इसमें ऐसे आयकरदाता है जो कि काम छोटे स्तर पर करते हैं लेकिन नियमानुसार टैक्स भरते हैं।

पांच साल पहले का आंकड़ा

17.50 लाख की आबादी में आज से पांच साल पहले के आंकड़ों पर नजर डालें तो जनपद में 20 हजार ऐसे लोग थे जो कि आयकर रिटर्न भरने और टैक्स देते थे। हर साल यह आकड़ा बढ़ता रहा। लगातार जागरूकता और सरकार के प्रयासों के चलते संख्या बढ़ती चली गई। अब जिले में 50 हजार ऐेसे लोग शामिल हो गए हैं। ये लोग 20 करोड़ रुपये सरकार को आयकर के रूप में देते हैं।

चार साल से नहीं पड़े छापे और सर्वे

आयकर विभाग की ओर से जनपद में चार साल से न तो सर्वे की कार्रवाई हुई है और न ही छापेमारी की गई है। इसके पीछे यह वजह बताई जा रही है कि लोग नियमानुसार टैक्स जमा करते हैं। इस बीच विभाग को कोई शिकायत भी प्राप्त नहीं हुई है।

ऐसे भी हैं लोग

सासनी-विजयगढ़ निवासी रवि वार्ष्णेय की मिठाई की छोटी सी दुकान हैं। उनके पिता रवि कुमार वार्ष्णेय का अब निधन हो चुका है। जब उनके पिता थे, तब वे समय पर नियमानुसार आयकर व जीएसटी देते हैं। आज उनके बेटे भी टैक्स देते चले आ रहे हैं। टैक्स देकर वे गर्व महसूस करते हैं और लोगों की प्रेरित करते हैं।गुड़िहाई बाजार में संजय कुमार की गुड़ की छोटी सी दुकान है। वे हर साल आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं। उनका मानना है कि सरकार को जो हम टैक्स देते हैं। उससे ही विकास होता है। लहरा वाली गली निवासी सुरेश चंद्र अग्रवाल 70 वर्ष के हो चुके हैं। वे जाब वर्क का काम करते हैं। हर साल नियमित रूप से आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं। उनका मानना है कि यह एक अच्छी बात है। सालों से एेसा कर रहे हैं और लोगों को भी प्रेरित करते हैं कि वे भी एेसा करें। सादाबाद गेट निवासी चंदन गर्ग माला बनाने और गोटे का काम करते हैं। काम छोटा होने के बावजूद वे हर साल आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं।

Edited By: Anil Kushwaha