हाथरस, जागरण संवाददाता।  जिले में एक अप्रैल से 30 जून तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद के लिए 67 क्रय केंद्र बनाए गए थे। इस बार गेहूं की खरीद के लिए 67 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य तय था, मगर जिले में प्रशासन एक फीसद भी गेहूं की खरीद नहीं कर पाया। प्रशासन की सारी तैयारियां क्रय केंद्रों तक किसानों को लाने में विफल रहीं। मंडी में गेहूं का बेहतर भाव मिलने से किसानों ने सरकारी खरीद को भाव नहीं दिया।

हर वर्ष की भांति इस बार भी जिले में गेहूं खरीद तीन महीने पहले शुरू की गई थी। जिले में गेहूं खरीद के लिए 67 क्रय केंद्र हाथरस, सिकंदराराऊ, सादाबाद व सासनी तहसील क्षेत्रों में बनाए गए थे। इन केंद्रों पर गेहूं की खरीद एक अप्रैल से 15 जून तक की गई। इसमें गेहूं खरीद के लिए 2015 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य रखा गया था। आनलाइन पंजीकरण करने के बाद ही किसानों से गेहूं की खरीद की गई। 

तीन माह तक खुले रहे केंद्र

तीन महीने में गेहूं खरीद के लिए खरीद का लक्ष्य 67 हजार मीट्रिक टन निर्धारित था। लक्ष्य जुटाने को अधिकारी भी गांव तक दौड़े। आनलाइन टोकन निकालने के लिए किसानों को जागरूक किया गया। इसके बाद भी पंजीकृत 1563 किसानों में से मात्र 157 किसान ही गेहूं बेचने क्रय केंद्रों पर पहुंचे। इस तरह निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष 0.80 फीसद ही गेहूं की खरीद हो सकी।

समर्थन मूल्य पर भारी बाजार का भाव

गेहूं खरीद के लिए जिले में प्रशासन की सारी तैयारियां किसानों को क्रय केंद्रों तक लाने में विफल रही। निर्धारित 67 हजार एमटी लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 493 एमटी गेहूं ही खरीदा जा सका। कराए गए पंजीकरण में से मात्र दस फीसद किसान ही केंद्र तक पहुंचे। इसका सबसे बड़ा कारण समर्थन मूल्य 2015 के सापेक्ष मंडी व बाजार में गेहूं का मूल्य 22 सौ रुपये प्रति क्विंटल होना भी रहा।

15 दिन खरीद बढ़ाना बेकार गया

शासन के निर्देश पर गेहूं की खरीद के लिए 15 दिन का समय बढ़ाया गया। इसके चलते 15 जून से 30 जून तक गेहूं की खरीद के लिए क्रय केंद्र और खोले गए। किसानों की बेरुखी के चलते बढ़े दिनों में भी क्रय केंद्र सूने पड़े रहे। करीब 27 से अधिक क्रय केंद्रों पर तीन महीने में एक भी किसान गेहूं लेकर नहीं पहुंचा। जिला विपणन अधिकारी शिशिर कुमार ने बताया कि बाजार मूल्य अधिक होने पर ही गेहूं खरीद बहुत कम रही।

मक्का व बाजरा की फसल से अटी पड़ी मंडी

मंडियों में बीस दिन पसरा सन्नाटा अब खत्म हो गया है। मक्का व बाजरा की फसलों से मंडियां अटी पड़ी है। अलीगढ़ रोड स्थित मंडी समिति में दुकानों से लेकर सड़क तक मक्का व बाजरा ही दिख रहा है। प्रतिदिन मंडी में दोनों फसलों की आवक 12 हजार क्विंटल तक हो रही है। इससे व्यापारियों व पल्लेदारों के चेहरे खिल गए हैं। पल्लेदारों को रोजगार मिलना शुरू हो गया है। फसलों की खरीद के लिए व्यापारी भी आ रहे हैं।

Edited By: Anil Kushwaha