Gen Z की ताकत के आगे दबाव नहीं आया काम, AMU प्राॅक्टर को हटाकर ही माने
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव और प्रॉक्टर को हटाने की मांग को लेकर छात्रों का 20 दिवसीय धरना सफल ...और पढ़ें

AMU का प्रवेश द्वार।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर 20 दिन तक चले धरने में छात्रों की एकजुटता और जे-जीन की ताकत प्रशासन पर भारी पड़ी। दबाव, निलंबन और कार्रवाई के बावजूद छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। कुलपति प्रो. नईमा खातून ने चुनाव कराने और निलंबित छात्र यासिर फहद का निलंबन वापस लेने का भरोसा दिया।
लेकिन छात्रों ने प्राक्टर को हटाने की मांग पूरी होने तक धरना खत्म करने से इन्कार कर दिया। आखिरकार प्रशासन को प्राक्टर बदलने और चुनाव कार्यक्रम जारी करने का निर्णय लेना पड़ा। छात्रों की प्राक्टर से नाराजगी की एक प्रमुख वजह 14 सितंबर को विमेंस कालेज के अब्दुल्ला हाल में हुआ हंगामा भी था। खाने की गुणवत्ता को लेकर छात्राओं ने प्रदर्शन करते हुए गेट बंद कर दिया था।
गेट खुलवाने के दौरान प्राक्टोरियल टीम और छात्राओं के बीच धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद छात्राओं में प्राक्टर के प्रति आक्रोश बढ़ गया। इस मामले में हंगामे की साजिश के आरोप में यासिर फहद को निलंबित कर दिया गया। निलंबन आदेश जारी होते ही वह धरने पर बैठ गया। प्राक्टोरियल टीम ने चार-पांच अन्य छात्राओं को भी चिह्नित कर पूछताछ के लिए बुलाया था।
धरने के दौरान रास्ता बंद करने के मामले में भी पुलिस को पांच-छह छात्रों के नाम दिए गए, जिनमें आरिज खान का नाम शामिल था। उसे छात्र के बजाय बाहरी युवक बताया गया और बाद में वह जेल गया। धरने के दौरान छात्रों के बीच मारपीट के मामले में फैसल त्यागी की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया, जबकि दूसरे पक्ष की ओर से मुकदमा दर्ज न हाेने के चलते छात्रों का आक्रोश सातवें आसमान पहुंच गया।
उनके लिए चुनाव से ज्यादा प्राक्टर का इस्तीफा था। उनके लिए छात्राओं ने भी ढाल बनने का किया। वीमेंस कालेज की छात्राएं तो सड़क पर उतरी हीं, यूनिवर्सिटी के विभिन्न हाल की छात्राएं भी बड़ी संख्या में धरने पर पहुंची और समर्थन दिया।
सीजेपी के जुड़ाव और राजनैतिक हस्तक्षेप भी
धरने को समर्थन देने के लिए सीजेपी से जुड़े रहे जुनैद भी शामिल हुए। जुनैद दिल्ली में चले सीजेपी के धरने में लोगों को खाना पहुंचाने को लेकर चर्चाओं में आए थे। सपा और कांग्रेस के नेताओं ने भी धरने में पहुंच कर राजनीति गरमा दी थी। इसके चलते और एएमयू प्रशासन पर दबाव बढ़ता चला गया।
