अलीगढ़, जागरण संवाददाता । रेडिएंट स्टार्स इंग्लिश स्कूल, खैर रोड की प्रधानाचार्य अंजू राठी ने कहा है कि सार्वजनिक संपत्ति वह संपत्ति है जिसका उपयोग देश का हर व्यक्ति कर सकता है। सार्वजनिक संपत्ति के रूप में ऐसे भवन या सम्पत्ति को माना जाता है जिसका उपयोग जल, प्रकाश, शक्ति या ऊर्जा उत्पादन या वितरण में किया जाता है। इसके अतिरिक्त कोई तेल प्रतिष्ठान, सीवरेज खान या कारखाना या फिर कोई लोक परिवहन या दूरसंचार साधन भी सार्वजनिक संपत्ति में ही आते हैं। हमें हर हाल में सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना चाहिए और हिंसा से दूर रहना है। यदि कोई सार्वजनिक संपत्ति जैसे बस, इमारत आदि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है तो उसे रोकना चाहिए। सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना हमारा मौलिक कर्तव्य है।

सरकारी संपति का नुकसान यानी अपना नुकसान

किसी भी तरह हमारा प्रयत्न यही रहना चाहिए कि सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति को किसी भी प्रकार का नुकसान ना हो। इसका नुकसान होने का मतलब है कि हम अपना ही नुकसान कर रहे हैं। हमारे मौलिक कर्तव्य में यह भी आता है कि हम सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करें और हिंसा से दूर रहें। व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधि के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता के लिए प्रयास करें ताकि राष्ट्र हमेशा उच्च स्तर की उपलब्धि हासिल करे। संविधान की शपथ सिर्फ नेताओं के लिए नहीं बल्कि आप और हम भी उसी दायरे में हैं। भारतीय संविधान के अनुसार अपने कर्तव्य हमें जानने जरूरी हैं। बात हमेशा अधिकारों की होती है। अक्सर अधिकारों की मांग और उससे जुड़े मामले चर्चा में भी रहते हैं। सरकार, पुलिस, प्रशासन आदि पर इस बात का हमेशा दबाव बनाया जाता है कि फलां के अधिकारों का हनन हो रहा है या फलां को अधिकार से वंचित रखा जा रहा है, लेकिन क्या आपने कभी अधिकारों की तरह कर्तव्यों की बात सुनी है।

हमें अपने कर्तव्‍यों को जानना जरूरी है

नागरिक ये कहते हों कि हमारा ये कर्तव्य है, ये फर्ज है जिसे हमें हर हाल में बनाए रखना है। ऐसा नहीं है। जिस गंभीरता से अधिकारों की बात होती है, उस गंभीरता से कर्तव्यों की बात नहीं सुनी जाती, जबकि संविधान में ये दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। जहां अधिकार है? वहां कर्तव्य भी है। इसलिए हमें अपने कर्तव्य के बारे में जानना जरूरी है। हमारे संविधान के मुताबिक अधिकार और कर्तव्य के बीच अन्योन्याश्रय संबंध है। यानी कि एक की दूसरे के बिना कल्पना भी नहीं की जा सकती। जहां कर्तव्य है, वहीं अधिकार हैं। संविधान देखें तो अधिकार के साथ कर्तव्य भी जोड़े गए हैं, जिसके बारे में हमें भलीभांति वाकिफ होना चाहिए और उसी के हिसाब से हमें अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी नागरिकता कानून के कारण हुई ङ्क्षहसा के बारे में कहा कि उत्तर प्रदेश में जिस तरह लोगों ने ङ्क्षहसा कर संपत्ति को नष्ट किया वो अपने घर में बैठकर सोचें कि क्या ये सही था? उन्हें इसके लिए आत्मङ्क्षचतन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्ति को तोडऩे वालों को मैं कहना चाहूंगा कि बेहतर सड़क, बेहतर ट्रांसपोर्ट सिस्टम, उत्तम सीवर लाइन नागरिकों का हक है तो इसे सुरक्षित रखना और साफ-सुथरा रखना भी तो उनका कर्तव्य है।

हम अक्‍सर सरकारी सुविधाओं की आलोचना करते हैं जो गलत है

प्राय: यह देखने में आता है कि हम अपने देश में व्याप्त सरकारी सुविधाओं की आलोचना करते हैं। सरकारी तंत्र को बुरा भला कहते हैं। अपने देश को दूसरे अन्य देशों की तुलना में तौलते हैं। क्या कभी किसी ने सोचा है कि देश के विकास में उनका क्या योगदान है? क्या आपको मिली सुविधाओं का सम्मान आप करते हैं? ये भी नहीं जानते कि किसी व्यक्ति की ओर से दिया जा रहा टैक्स उन्हीं की सुविधाओं पर खर्च होता है। ऐसे में ये जरूरी हो जाता है कि क्या लोग ईमानदारी से टैक्स भरते हैं? इसलिए सार्वजनिक संपत्ति का प्रयोग हमको अपनी संपत्ति समझकर करना चाहिए। किसी भी अच्छी चीज की शुरुआत हमें खुद से ही करनी चाहिए। आज की पीढ़ी को इसका ज्ञान देना चाहिए। इससे हमारा देश भी विकसित देशों में गिना जाएगा।

Edited By: Anil Kushwaha