अलीगढ़ : हरपाल हॉस्पिटल के संचालक डॉ. नरेंद्र चौधरी की हत्या में फरारी काट रहे चार अभियुक्तों के सीजेएम कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर भी ये लोग हाजिर नहीं हुए थे, तब इन पर 10 हजार अर्थदंड लगा। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अर्थदंड जमा न करने पर वसूली की कार्रवाई की जाए।

डॉ. नरेंद्र की हत्या 24 सितंबर-14 को हुई थी। हत्या के मूल में जमीन का विवाद बताया गया। मा शकुंतला देवी ने क्वार्सी थाने में पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। बाद में कुछ और नाम प्रकाश में आए। विवेचना कई थानों से गुजरी। कई विवेचक बदले गए, मगर नतीजा सामने नहीं आया। स्वर्ण जयंती नगर निवासी शोभित नागपाल को भी आरोपी बनाया। पुलिस ने उसे जेल भेजकर दो जुलाई-15 में चार्जशीट दाखिल कर दी। बाकी आरोपियों की जाच चलती रही। चार नाम निकाल दिए गए, इनमें एक नाम पूर्व सपा विधायक के भाई का भी था। ढाई साल बाद क्वार्सी पुलिस ने मनोज उर्फ सोनू निवासी नगला खेम बुढ़ासी, राहुल बमनोई अकराबाद, शीलू बमनोई व सरमिस्टर उर्फ मिस्टर निवासी रूप नगर पिसावा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई। पुन: जांच में भी पुलिस ने दोषी माना और चार्जशीट दाखिल की, जिसका संज्ञान कोर्ट ने पांच फरवरी को लिया।

कोर्ट में याचना : डॉ. नरेंद्र की पत्‍‌नी डॉ. नताशा के सीजेएम कोर्ट में पेश प्रार्थना पत्र में कहा कि अभियुक्तों की याचिका पर हाईकोर्ट ने 27 नवंबर- 14 को दस दिन में कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए थे। हाजिर न होकर अभियुक्तों ने याचिका दायर की, जिस पर हाईकोर्ट ने तीस दिन का और समय दिया, मगर वे हाजिर नहीं हुए और फिर याचिका दायर की। तब 16 अगस्त- 16 को हाईकोर्ट ने 10 हजार रुपये अर्थदंड सीजेएम कोर्ट में जमा करने के आदेश के साथ न करने पर भू-राजस्व की तरह वसूली के लिए कोर्ट से कहा। अभियुक्त कोर्ट के आदेश की अवेहलना करते रहे, लिहाजा इनके गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए। अर्जी का संज्ञान लेकर कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं।

Posted By: Jagran

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