विनोद भारती, अलीगढ़। मोदी सरकार आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी योजनाओं को बड़े गेम चेंजर के रूप में देख रही है, अफसोस योजना की धमनियों में फर्जीवाड़े का गंदा खून बार-बार शामिल हो रहा है। अब गरीब मरीजों के इलाज में 85.49 लाख रुपये से ज्यादा का फर्जीवाड़ा सामने आया है। अस्पताल संचालकों ने हर मरीज को गंभीर दर्शाकर तगड़ा क्लेम फाइल किया। शासन स्तर से जांच हुई तो भेद खुल गया। संचालक इलाज संबंधी दस्तावेज ही नहीं, मरीज का फोटो तक उपलब्ध नहीं करा पाए। ऐसे में शासन ने इस क्लेम को रिजेक्ट कर दिया। संचालकों ने भी इस क्लेम को पाने के लिए पुन: प्रयास तक नहीं किया। इससे साफ है कि इलाज के नाम पर कुछ न कुछ धांधली तो हो रही है।

36 हजार से अधिक को मिला इलाज

जिले में 25 सितंबर 2018 से प्रारंभ हुई आयुष्मान योजना के अंतर्गत अब तक 36 हजार 99 से अधिक गरीब मरीजों को इलाज मिल चुका है। मुफ्त इलाज के लिए करीब 50 सरकारी व निजी हास्पिटल पैनल में शामिल किए गए हैं, जिनमें किडनी, टीबी, दिल की बीमारी, मैटरनल हेल्थ और सी-सेक्शन या उ'च जोखिम प्रसव की सुविधा, नवजात और ब'चों के स्वास्थ्य, कैंसर, टीबी, कीमोथेरपी, रेडिएशन थेरेपी, हार्ट बाईपास सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, दांतों की सर्जरी, आंखों की सर्जरी, जनरल सर्जरी, लिवर, शुगर, घुटना प्रत्यारोपण आदि बीमारियों का उपचार होता है। प्रत्येक लाभार्थी का गोल्डन कार्ड होना अनिवार्य है।

1218 मरीजों का फर्जी क्लेम पकड़ा

पैनल में शामिल अस्पतालों की तरफ से विगत वर्षों में 20.50 करोड़ रुपये का क्लेम फाइल किया गया। इसमें 19.65 करोड़ रुपये का क्लेम ही स्वीकृत किया गया। जबकि, 14.99 करोड़ रुपये का भुगतान अस्पताल को कर दिया गया। 4.65 करोड़़ रुपये का भुगतान अवशेष है। 85.49 लाख रुपये का क्लेम फर्जीवाड़ा साबित होने पर रिजेक्ट कर दिया गया। दरअसल, अस्पताल संचालकों ने इलाज के नाम पर एक ही मरीज के नाम पर कई-कई पैकेज दर्शा दिए, जिनका खर्च अलग-अलग तय किया गया है। ऐसे कुल 1271 मरीजों का ब्योरा सामने आया, जिन्हें गंभीर दर्शाया गया, ताकि ज्यादा क्लेम का हासिल हो सके। लखनऊ में गठित विशेषज्ञों की टीम ने क्लेम का अध्ययन किया तो मामला समझ में आ गया। वहां से क्लेम को तुरंत होल्ड पर रखते हुए जांच शुरू कर दी गई। संचालकों को मरीजों की पहचान, जांच व इलाज संबंधी अन्य दस्तावेज व फोटो आदि अपलोड करने के निर्देश दिए गए। हैरानी की बात ये है कि अधिकतर संचालकों ने कोई जवाब नहीं दिया। आपत्ति पेंङ्क्षडग होने के कारण क्लेम को रिजेक्ट कर दिया गया। इससे साफ है कि फर्जी क्लेम के जरिए कुछ संचालक सरकार को चपत लगाने से पीछे नहीं। एक हास्पिटल को पैनल से हटाया भी जा चुका है। ये स्थिति अलीगढ़ ही नहीं, प्रदेश के अन्य जनपदों में सामने आई है। करोड़ों रुपये के फर्जी क्लेम रिजेक्ट किए गए हैं।

योजना की खास बातें

  • - जिले में 2,58, 502 लाभार्थी परिवार।
  • - जिले में 12,20,145 लाभार्थी।
  • - ग्रामीण क्षेत्र में 7,42,180 लाभार्थी।
  • - शहरी क्षेत्र में 04,90,921 लाभार्थी।
  • - हर परिवार को साल में पांच लाख तक मुफ्त इलाज।
  • - जिले में 2.80 लाख गोल्डन कार्ड बनाए गए।

इनका कहना है

केंद्र सरकार ने आयुष्मान योजना में इलाज की दरें-पैकेज निर्धारित किए हैं। जो संचालक इलाज खर्च से अधिक क्लेम कर देते हैं, वे जांच के दौरान पकड़ में आ जाते हैं। लखनऊ में गठित टीम संदिग्ध क्लेम में संचालकों से दस्तावेज मांगती है, प्रतिक्रिया न मिलने पर क्लेम रिजेक्ट कर दिए जाते हैं। अत: संचालक शासन की मंशा के अनुसार पारदर्शिता बरतते हुए मरीजों का उपचार करें और व्यय राशि प्राप्त करें।

- डा. आनंद उपाध्याय, सीएमओ।

Edited By: Anil Kushwaha