अलीगढ़ (विनोद भारती)। प्राइवेट अस्पतालों में मरीज इलाज की उम्मीद लेकर ही आते हैं। यदि उन्हें यहां घर जैसा लजीज व शुद्ध भोजन भी मिल जाए तो बीमारी भी भूल जाएं। शहर के प्रसिद्ध गांधी आई हॉस्पिटल में नेत्र सर्जन डॉ. अमित गुप्ता की पहल से यह संभव कर दिया है। डॉक्टर साहब एक तरफ ओपीडी तो दूसरी तरफ ऐसी रसोई चला रहे हैं, जहां मरीजों को मात्र 20 रुपये में घर जैसा भोजन मिल रहा है। यह कीमत भी मरीजों व अन्य लोगों के स्ïवाभिमान बचाए रखने के लिए है। बेहद गरीब मरीजों को भोजन मुफ्त भी मिल जाता है।

परिचय : मूलरूप से जनपद कासगंज के सोरों गेट निवासी डॉ. अमित ने करीब पांच साल पूर्व हॉस्पिटल ज्वाइन किया। इसे रेटीना (आंख के पर्दे) के ऑपरेशन के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित किया। उनकी प्रतिभा को देखते हुए प्रबंधन ने उन्हें हेड ऑफ रेटीना क्लीनिक बना दिया।

मन की बात से प्रेरणा

डॉ. गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' में देश के समर्थ युवाओं को जन कल्याण के लिए आगे आना चाहिए। तब मैने सोचा की देश में आज भी भुखमरी है। भूखों का पेट भरने की शुरुआत करनी थी। ऐसे में मैनेजमेंट के  समक्ष हॉस्पिटल में रसोई चलाने की अनुमति मांगी, जिसे सहर्ष स्वीकृति मिल गई। 17 अक्टूबर 2017 को मां आशा गुप्ता व सासू मां सुमन गुप्ता की स्मृति में रसोई का उद्घाटन हुआ। पहले भोजन मुफ्त दिया गया, मगर मरीज खैरात समझकर इन्कार करने लगे। तब, 20 रुपये में भरपेट भोजन की व्यवस्था लागू की। थाली में तड़के वाली दाल, सब्जी, चावल, रोटी, रायता के साथ कई मौकों पर फल व मिठाई आदि भी शामिल की जाती हैं। तमाम स्टाफ और हॉस्पिटल के कॉलेज से छात्र-छात्राएं भी रसोई में आने लगे हैं। रसोई से मैं छह लोगों को रोजगार भी दे पाया। पत्नी डॉ. कंचन गुप्ता भी नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं और चैरिटेबल हॉस्पिटल में सेवाएं देती हैं। दोपहर एक बजे के बाद वे भी रसोई को देखने आ जाती हैं। सारी व्यवस्था वही देखती हैं।

आर्थिक स्थिति ठीक नहीं

तीमारदार नरेश ने बताया कि बहुत अच्छी पहल है। मेरे पिता कई दिनों से हॉस्पिटल में भर्ती हैं। मैं और मेरी पत्नी भी साथ हैं। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि होटल से 150-200 रुपये का भोजन लाएं। यहां सस्ता भोजन मिलने से काफी राहत मिली। रसाई कर्मचारी लटूरी सिंह ने बताया कि बघेल नगर में किराये के मकान में रहता हूं। कोई काम नहीं था। डॉक्टर साहब की कृपा से मैं और मेरी पत्नी को रसोई में काम मिल गया।

डॉ.अमित ने की अच्छी पहल

प्रशासनिक अधिकारी मधुप लहरी ने बताया कि डॉ. अमित ने बहुत अच्छी पहल की। कई बार मरीजों के पास इतने पैसे भी नहीं होते कि वह होटल के खाने का खर्च वहन कर सकें। हॉस्पिटल की रसोई में सस्ता और अच्छा खाना मिलने से काफी सहूलियत हुई है।

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Posted By: Sandeep Saxena

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