अलीगढ़, जागरण संवाददाता। पराली को लेकर सतर्क महकमे हर स्तर पर आग बुझाने के प्रयास कर रहे हैं। तहसील स्तर पर पुलिस व कृषि विभाग की टीमें गठित हैं ताे वहीं ग्राम पंचायतों में किसान मित्र भी पराली पर निगरानी रखे हुए हैं। पिछले तीन दिन में खेतों में आग की चार घटनाएं सामने आईं, इनमें दो मामले पराली से जुड़े थे। बाकी दो मामलों में कूड़ा जलता पाया गया। पराली जलाने पर किसानों पर जुर्माने की कार्रवाई की गई। वहीं, 800 कुंतल पराली गोशालाओं में भिजवाई गई है।

पराली के प्रति किसानों को किया जागरूक

धान की कटाई के बाद पराली जलने की घटनाएं अक्सर होती हैं। इससे अत्याधिक प्रदूषण फैलता है। वातावरण में धुंध छा जाती है। प्रतिबंध के बावजूद किसान पराली जलाते हैं। धान की कटाई के समय हर साल प्रशासनिक कवायद तेज हो जाती है। किसानों को पराली प्रबंधन के लिए प्रेरित करने के अलावा पराली जलाने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी जाती है। इन दिनों गांव-गांव यही हो रहा है। इसमें किसान मित्रों की मदद भी ली जा रही है। ग्राम पंचायतों में नियुक्त किसान मित्र चौपाल लगाकर किसानों को पराली प्रबंधन की जानकारी दे रहे हैं। गुरुवार को गंगीरी विकास खंड के गांव बाई खुर्द और टप्पल विकास खंड के गांव करनपुर समेत अन्य गांवों में चौपाल लगाई गई। जिला कृषि अधिकारी डा. रामप्रवेश ने बताया कि पराली का उपयोग खाद, पशुओं के बिछावन और चारे के रूप में किया जा सकता है। किसान पराली को खेत में डालकर जोताई कर यूरिया डाल दें और सिंचाई करें तो कुछ दिन पराली सड़कर खाद बन जाएगी। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। बहुत से किसान इस विधि को अपना कर लाभ कमा रहे हैं। जो किसान परालीसे जुड़े हुए हैं। उन्हें भी पराली जलाने की बजाय खाद बनाने पर ध्यान देना होगा। इससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होगा। सभी किसानों को इसमें सहयोग करना चाहिए।