अलीगढ़ जेएनएन: केंद्र सरकार की ओर से नया विद्युत सुधार बिल 2020 और निजीकरण लाया गया। नए विद्युत सुधार बिल 2020 और निजीकरण के विरोध में सोमवार को बिजली कर्मचारियों ने काला दिवस मनाया। इसके साथ ही कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की । लॉकडाउन के चलते यह बिजलीकर्मियों का पहला प्रदर्शन था। प्रदर्शन के दौरान शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए कर्मचारियों ने प्रदर्शन करने की पूरी कोशिश की।

काली पट्टी बांधकर किया प्रदर्शन

लाल डिग्गी बिजलीघर कार्यालय पर जुटे कर्मचारियों के दाहिने हाथ पर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया था। दोपहर डेढ़ से तीन बजे तक लगातार कर्मचारियों का प्रदर्शन चलता रहा। संयुक्त कर्मचारी विद्युत संघर्ष समिति के अध्यक्ष अरविंद कुमार का कहना था कि इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2020 और निजीकरण से किसान और आम उपभोक्ताओं को बिजली महंगी मिलेगी। किसी भी उपभोक्ता को लागत से कम मूल्य पर बिजली नहीं दी जाएगी।

बिजली की लागत बढ1ी

वर्तमान में बिजली की लागत 6.78 रुपये प्रति यूनिट मिल रही है । निजीकरण के बाद कंपनी एक्ट के अनुसार निजी कंपनी को न्यूनतम मुनाफा भी दिया जाए, तब भी आठ रुपये प्रति यूनिट से कम में बिजली किसी को भी नहीं मिल पाएगी। किसानों को लगभग छह हजार रुपये प्रति माह और घरेलू उपभोक्ताओं को आठ हजार से दस हजार रुपये प्रति माह तक बिल देना होगा।

प्रधानमंत्री और सीएम को भेजा ज्ञापन

मुख्य अभियंता के माध्यम से प्रधानमंत्री और सीएम को ज्ञापन भेजा गया है। संयोजक धर्मेंद्र सारस्वत ने कहा कि किसी भी तरह से निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा । इस मौके पर अधीक्षण अभियंता राघवेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता मोहम्मद सगीर, राजकुमार  सिंह, जीएस कासेरवाल, कमल जैन, प्रचार सचिव प्रवीण शाक्य, अश्वनी कुमार, उदल सिंह, शरद सक्सेना,  तक्षक भारद्वाज, संजय चौहान, भूपेंद्र रावत, शैलेंद्र कुमार, सौरभ मंगला, अरूण यादव, सुबोध झा, सतवीर सिंह, ललतेश यादव आदि लोग मौजूद थे।

Posted By: Sandeep Saxena

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