अलीगढ़, जागरण संवाददाता। Aligarh news : तीन दिन से लगातार बरसात झेल रहे लोगों के लिए बुधवार की रात आफत बनकर आई। आसमान से बरसती ठंडी बूंदे गरीबों के सीने पर आग के शोलों की तरह पड़ रही थीं। गुरुवार की सुबह तक मोहल्ले व कालोनियां जलभराव से ऐसी घिरीं कि गरीबों के चूल्हे पानी में डूब गए। रसोई ऐसे तरबतर हुईं कि लाख कोशिशों के बाद भी न सुलगे। सुलग रही थी तो बस पेट की आग। किसी गरीब के घर में भूखे बच्चे बिलख रहे थे तो काम पर जाने वाले कई लोग सड़कों पर धक्के खा रहे थे। स्कूटी, बाइक पानी में बंद हो रही थीं। ढकेल-रेहड़ी लगाकर रोजाना की जरूरत पूरी करने वाले लोग हाथ पर हाथ धरे बैठे थे। मुसीबत के मारे ये लोग मदद की राह ताकते रहे। हर तरफ बेबसी और बेहाली का मंजर था। 

एडीए, शाहजमाल, भुजपुरा, नौरंगाबाद, कुंवर नगर, पला रोड, मेलरोज बाईपास के साथ ही शहर के पाश इलाके विद्यानगर, सेंटर प्वाइंट पर भी पानी का कब्जा रहा। लोग रिश्तेदार व अन्य जान-पहचान वालों के यहां पलायन करने को मजबूर हैं। अगर आने वाले दिनों में भी इंद्रदेव का यही रुख रहा तो फिर और भी नई चुनौतियां आने की संभावना है।

शहर के मेलरोज बाइपास निवासी रामसेवक का कहना है कि वह चाट-पकौड़ी की ढकेल लगाकर परिवार का भेट भरते हैं, लेकिन चार दिन की बरसात ने उनके सब कुछ छीन लिया है। काम करना तो दूर घर निकला भी दूभर है। पूरा परिवार हाथ पर हाथ रखे बैठा है। यह उनकी इकलौती समस्या नहीं है, शहर के दर्जनों मोहल्ले व हजारों लोग इसी तरह परेशान हैं।

चार दिन में 145 एमएम रिकार्ड तोड़ पानी : जिले में रविवार की रात से बरसात की शुरुआत हुई। पहले दिन सोमवार को जिले में औसतन 26.75 एमएम बरसात हुई। इसी वर्षा के साथ जलभराव शुरू हो गया। इसके बाद मंगलवार को 12.80 एमएम बरसात हुई। इससे और अधिक परेशानियों की शुरुआत हो गई। बुधवार को भी नौ एमएम से अधिक पानी पड़ा, लेकिन बुधवार की रात से बरसात ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया।15 घंटे से भी अधिक समय तक बरसात होती रही। गुरुवार को सौ एमएम तक बरसात हो गई।

मुसीबत के मारों ने शुरू किया पलायन : अधिक बरसात से सबसे अधिक मुसीबत निचले इलाके में रहने वाले लोगों को हो रही है। एडीए के शाहजमाल व भुजपुरा में पिछले दो दिन पानी भरा हुआ है। लोग पूरी-पूरी रात जगकर काट रहे हैं। बुधवार की रात की वर्षा को देखते हुए अब लोगों ने पलायन शुरू कर दिया।गुरुवार को भी इन क्षेत्रों के दो दर्जन से अधिक लोग पलायन कर गए। कोई अपने रिश्तेदार के यहां जा रहा है तो कोई अन्य लोगों के यहां ठिकाना बना रहा है। कई परिवार तो भूखे की गुजर-बसर करने को मजबूर हैं।

मजदूर वर्ग अधिक परेशान : बरसात से वैसे तो हर कोई परेशान हैं। छोटे-बड़े सभी काम प्रभावित हैं, लेकिन सबसे अधिक मुसीबत मजदूर वर्ग की हो रही है। काम न मिलने से इनपर सबसे अधिक संकट है। बच्चों का पेट भरना तक मुश्किल हो गया है। चाट पकौड़े, फल, जूस, अंडे आदि की ढकेल लगाने वालों को भी काम ठप हैं। व्यापारी वर्ग भी ग्राहकों के न आने से परेशान है।

दो तीन दिन से पूरा घर है जलमग्न

दो दिन से घर में पानी भरा हुआ है। रोजी तो रोटी के भी लाले हैं। इधर-उधर से सामान मंगाकर बच्चों को पेट भर रहे हैं। बरसात ने एक साथ काफी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। पूरा परिवार परेशान है।

- हारून अहमद, एडीए कालोनी

बरसात ने रोजी व रोटी दोनों पर संकट ला दिया है। कोई काम नहीं हो पा रहा है। सड़कों के साथ ही घरों के अंदर भी पानी भरा पड़ा है। रसोई में खाना तक नहीं बना है। कोई बाहर नहीं निकल पा रहे। अगर बरसात बंद नहीं हुई तो आने वाले दिनों में घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ेगा।

- मोहम्मद जगीर, चरखवाला

Edited By: Anil Kushwaha