राहुल वार्ष्णेय, अलीगढ़।  शराब के नशे में माफिया ने थप्पड़ क्या उठाया कि युवा जोश जाग उठा। शराब बंदी का स्वर उठा और मुहिम खड़ी हो गई। गांव में चलने वाली 20 अवैध भट्टियां बंद करा दी गईं। बाहर से पीकर आने वाले शराबियों को रास्ते में ही रोक दिया जाता। आखिर में उन्होंने भी नशे को बाय कर दी। इसके साथ ही अलीगढ़ जिले के गंगीरी क्षेत्र स्थित मिरगौला की तस्वीर ही बदल गई। जुआ व शराब के लिए 70 साल से बदनाम यह गांव अब अनुकरणीय के रूप में पेश किया जाता है।

यह थे गांव के हालात
जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूरी पर पडऩे वाले मिगरौला में 200 परिवार रहते हैैं। यह आजादी के वक्त से ही अवैध शराब के धंधे के लिए बदनाम था। एक चौथाई परिवार शराब के काम से जुड़े थे। गांव में कार्रवाई करना पुलिस के लिए आसान नहीं होता था। यदि कभी काम रुकवाती तो कुछ ही दिन असर होता। दिनभर माफिया दबंगई करते थे। सस्ती शराब खरीदने के लिए आसपास के गांवों के लोगों की भीड़ रहती। शाम होने के बाद गलियों में नशे में धुत लोगों का उपद्रव शुरू हो जाता था।

एेसे शुरू हुआ विरोध

तीन दिसंबर 2018 को नशे में धुत माफिया ने ग्रेजुएशन कर रहे नरेंद्र कुमार को थप्पड़ मार दिया। यह गांव के युवाओं को नागवार गुजरा। सब एकजुट होने लगे। रात होने से पहले ही तय कर लिया कि अब गांव में नशे का खेल खत्म कर दिया जाएगा। फैसले पर अमल को तुरंत 25 युवाओं की टीम बना दी, जिसने घर-घर जाकर शराब से दूर रहने का आग्रह किया। बुजुर्गों से मशविरा कर पांच दिसंबर को पंचायत की गई, जिसमें शराबबंदी का प्रस्ताव पारित हो गया।
शराब पीने पर 500 रुपये जुर्माना, भट्टी चलाने पर बहिष्कार
पंचायत में शराब पीने वालों पर 500 रुपये का जुर्माना और भट्ठी चलाने पर बहिष्कार की बात तय हुई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से भी प्रस्ताव पर सहमति की मुहर लगवा ली गई। इसके बाद शराब के खिलाफ मुहिम छेड़ दी गई, जिसमें महिलाएं भी शामिल हुईं। अगले ही दिन से कच्ची शराब बनाने वाले ठिकानों पर रात में पहरेदारी शुरू कर दी गई। शराब पीकर आने वाले लोगों को गांव में प्रवेश रोकना शुरू कर दिया। कोई विरोध करता तो सभी एकजुट होकर उसे समझाते। न मानने पर छह लोगों को तो पुलिस के हवाले कर दिया गया। दो लोगों पर जुर्माना लगाया, पर खराब न पीने की शर्त पर माफ कर दिया गया। गांव के बदले माहौल में भट्टी चलाने की तो किसी ने हिम्मत ही नहीं की। धीरे-धीरे शराब के कारोबार से लोग पीछे हट गए। गांव की ब्रजेश कुमारी बताती हैैं कि पहले निकलना तक दूभर था। अब राहत है।
मजदूरी से भी खुश
शराब के धंधे से जुड़े लोगों पर पहले आसानी से पैसा आता था, अब अधिकांश मजदूरी व खेती करके ही खुश हैैं। किसान ओमवीर सिंह ने बताया कि बेरोजगारों को रोजगार दिलाने में गांव के लोग सहयोग कर रहे हैं। इसके लिए गांव में हर माह बैठक होती है, जिसमें शिकायतों का भी निस्तारण मिलकर किया जाता है।

शुरू की मुफ्त कोचिंग
युवा संगठन ने गांव में मुफ्त कोचिंग शुरू की है। इसमें गरीब परिवारों के 25 बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। इन्हें गांव के लोगों की मदद से अगले साल अच्छे स्कूल में प्रवेश दिलाने की योजना है। एसपी देहात मणिलाल पाटीदार ने बताया कि गांव के लोगों के प्रयास सराहनीय है। इस मुहिम में पुलिस शुरू से ही साथ है। यह अन्य गांवों के लिए नजीर है। आसपास के गांव के लोगों को इससे सीख लेने की सलाह दी जा रही है।

Posted By: Mukesh Chaturvedi

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