जेएनएन, अलीगढ़: किसानों की खुशहाली से देश की तरक्की का रास्ता निकलता है, लेकिन शायद ही कभी सुनने को मिलता है कि देश का अन्नदाता खुशहाल हो रहा है। अब कुछ किसान इस मिथक को तोड़ रहे हैं जो परंपरागत खेती से दूरी बनाकर तरक्की का नया रास्ता तलाश रहे हैं। इसकी बानगी देखने को मिली गभाना क्षेत्र के गांव भरतरी गांव में, जहां चाचा-भतीजे ने मिलकर ड्रैगन फ्रूट की खेती कर अच्छी आमदनी की राह पकड़ ली है।जिला उद्यान अधिकारी एनके सहानियां का कहना है कि कम लागत में अधिक आय देने वाले ड्रैगन फ्रूट की मांग मुबंई, दिल्ली, मध्य प्रदेश समेत कई प्रांतों से की जा रही है। इसकी खेती कर किसान आर्थिक स्थिति सुधार रहे हैं। ऐेसे किसानों को खेती के लिए शासन से मदद भी दिलाएंगे। 

25 वर्षों तक होती है आमदनी

दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई करने के बाद से ही खेती में नए-नए प्रयोग कर अलग पहचान बनाने वाले युवा किसान प्रेमप्रकाश ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे भतीजे कमल शर्मा के साथ मिलकर इस बार मध्य अमेरिका के फल ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है। उन्होंने बताया कि इस फसल में केवल एक बार लागत व निवेश के बाद करीब 25 वर्षों तक लगातार आमदनी हो सकती है। उन्होंने पैतृक गांव भरतरी में करीब साढ़े पांच बीघा भूमि में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है। 

कैसे होती है खेती 

साउथ अमेरिका मूल के ड्रैगन फ्रूट को सभी तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है। धान और गन्ने के मुकाबले इसे कम पानी की जरूरत होती है। एक बार पौधा लगाए जाने के बाद दो साल में पूरी लागत निकल आती है और फिर 25 सालों तक मुनाफा कमाया जा सकता है। प्रत्येक पौधा मानसून के दौरान 30-40 दिन के अंतर पर फल देता है। एक फल का वजन 80 ग्राम से 350 ग्राम तक होता है। यह फल लाल व सफेद रंग दो तरह का होता है। यह 200-400 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिकते हैं। ड्रैगन फ्रूट का पौधा काफी नाजुक होता है। इसे किसी पिलर के सहारे खड़ा करना होता है और ऊपर से हल्का पानी देना होता है। एक पिलर में चार पौधे लगा सकते हैं। उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक एकड़ में करीब छह क्विंटल फल का उत्पादन होता है। एक बार लगा पौधा कई साल तक फल देता है। इससे किसानों की अच्छी आय होती है। इसमें पिलर बनवाने का खर्च ही महंगा है, बाकी 50 रुपये का पौधा व गोबर की खाद लगती है। पानी की ज्यादा जरूरत नहीं होती है। इसमें बीमारी भी नहीं लगती है। नागफनी की तरह कांटे होने की वजह से इसे कोई जानवर भी नहीं खाता है।

अगस्त से आने लगते हैं फल 

पौधों में मई व जून में फूल लगते हैं और अगस्त से दिसंबर तक फल आते हैं, जिन्हें एक माह बाद ही तोड़ा जा सकता है। इसकी ड्रिप सिंचाई ज्यादा बेहतर रहती है।

असाध्य बीमारियों में है रामबाण 

ड्रैगन फ्रूट डायबिटीज, अस्थमा, कॉलेस्ट्रोल को घटाने व हीमोग्लोबिन को बढ़ाने के साथ ही कैंसर, डेंगू, चिकनगुनिया जैसे रोगों से लडऩे में सहायक होता है। इन बीमारियों के लिए यह फल रामबाण औषधि साबित हो रहा है। अधिक चर्बी वाले लोग भी इसका सेवन कर मोटापा कम कर सकते हैं। यह फल हार्ट को मजबूत करने के साथ ही आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी सहायक है। इसमें विटामिन बी, सी के साथ ही कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, डाइटी फाइबर जैसे तत्व भी अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। इसके पौष्टिक फल से जैम, आइसक्रीम व जैली भी बनाई जाती है। सौंदर्य प्रसाधनों के तौर पर भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। 

किसान के बोल 

किसान प्रेमप्रकाश शर्मा ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट एक प्रकार की कैक्टस बेल है। एक पौधे से एक बार में 8-10 फल प्राप्त होते हैं। तीन सौ से पांच सौ ग्राम वजनी इन फलों की कीमत 200 से चार सौ रुपये प्रति किलो ग्राम की कीमत मिलती है, जो दिल्ली की आजादपुर मंडी के अलावा ऑनलाइन आसानी से बिक सकते हैं। 

Posted By: Sandeep Saxena

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