अलीगढ़ जेएनएन: कोरोनावायरस से बचनेे के लिए घर पर रहकर जिदंगी दांव पर न लगाएं, बल्‍कि चिकित्‍सकों की सलाह पर ही अमल करें।कोविड अस्पतालों में भर्ती होने के डर से बीमारी छिपा रहे मरीजों के लिए सरकार ने होम आइसोलेशन की सशर्त मंजूरी दी है। इससे काफी संख्या में लोग खुद जांच के लिए आगे आए हैं। 60 फीसद से अधिक मरीज होम आइसोलेशन में ही इलाज करा रहे हैं। चिंता की बात ये है कि होम आइसोलेशन के लिए अब गंभीर मरीज भी अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। ऐसे तमाम मरीजों को तबीयत बिगडऩे पर लेबल-2 अस्पतालों में भर्ती करना पड़ा है। कई मरीजों की मृत्यु का कारण भी यही माना जा रहा है। ऐसे में विभाग होम आइसोलेशन देते समय काफी सावधानी बरतने लगा है। 

ऐसे मरीजों को छूट

प्रदेश सरकार ने कोरोना संक्रमित उन्हीं मरीजों को होम आइसोलेशन की इजाजत दी है, जिन्हें कोई लक्षण जैसे-सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार, सांस फूलना आदि  परेशानी नहीं हो। आइसोलेशन के लिए घर में अतिरिक्त कक्ष और शौचालय हो। 24 घंटे देखभाल के लिए एक तीमारदार हो। यदि, मरीज शर्तें पूरी नहीं कर पाता तो उसे 10 दिन के लिए लेबल-1 की सुविधा वाले कोविड अस्पताल भेज दिया जाता है। यदि लक्षण पाए जाते हैं तो मरीज को लेबल-2 की सुविधा वाले कोविड अस्पताल में भर्ती किया जाता है। ऐसे में मरीज की पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद सबसे पहले लक्षणों के बारे में ही पूछताछ की जाती है। इसके बाद ही निर्णय लिया जाता है कि उसे उपचार के लिए होम आइसोलेशन में रखा जाए या कोविड अस्पताल में। जिले में इस समय करीब 1700 सक्रिय मरीज हैं। करीब एक हजार संक्रमित मरीज होम आइसोलेशन में ही इलाज करा रहे हैं। हर मरीज होम आइसोलेशन में ही इलाज कराना चाहता है। पिछले दिनों ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें मरीज को होम आइसोलेशन से अस्पताल में शिफ्ट करना पड़ा। दरअसल, मरीजों ने कोविड जांच ही नहीं, बल्कि उसके बाद भी विभागीय टीमों को अपनी परेशानी के बारे में नहीं बताया। जांच के दौरान कई बुखार के रोगी तो पकड़ में आ जाते हैं, अन्य हल्के-फुल्के शुरुआती अन्य लक्षण पकड़ में नहीं आ पाते। इस तरह वे होम आइसोलेशन पाने में कामयाब हो जाते हैं। 

होम आइसोलेशन के लिए लक्षण छिपाकर कुछ मरीज खुद को मुसीबत में डाल देते हैं। यह वायरस बेहद तेजी से आक्रमण करता है। फेफड़ों को संक्रमित करते हुए किडनी, हृदय व अन्य अंगों पर असर डालने लगता है। इसलिए लक्षणों को बिल्कुल न छिपाएं। विभागीय सलाह के अनुसार ही उपचार लें। 

- डॉ. बीपीएस कल्याणी, सीएमओ

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