अलीगढ़, जागरण संवाददाता। Aligarh News : शहर में जगह-जगह खड़े जर्जर भवन हादसे की संभावनाएं बढ़ा रहे हैं। बरसात के दिनों में इनकी अनदेखी भारी पड़ सकती है। ऐसे 150 से अधिक भवन हैं, जो कब गिर जाएं, कहा नहीं जा सकता। municipal Corporation की कार्रवाई सिर्फ नोटिस देने तक सीमित है। इन्हें गिराने की हिम्मत विभागीय अधिकारी नहीं जुटा पा रहे हैं।

जर्जर भवनों की संख्‍या 150 के पार : 2017 में नगर निगम ने 79 dilapidated building चिह्नित किए थे। इनकी संख्या 150 से पार पहुंच चुकी है। हर बार मानसून से पहले नगर निगम अधिकारी भवन स्वामियों को नोटिस थमा आते हैं। आगे कोई कार्रवाई नहीं करते। निर्धारित समय सीमा में भवन स्वामी भवन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं होती तो नगर निगम द्वारा भवन ढहाया जाता है। इसका खर्च भवन स्वामी से लिया जाता है। ऐसे कई भवन तो बाजार के बीचोंबीच हैं। खिड़की, दरवाजे, दीवारें क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

घनी आबादी वाले इलाकों में भी ये भवन खड़े हैं। ऐसे भवनों में परिवार भी रह रहे हैं। कुछ भवन ऐसे हैं जहां लोग मजबूरी में रहते हैं। इनके पास सिर छिपाने की अन्य कोई व्यवस्था नहीं है। जो व्यवस्था कर सकते हैं, वे भी नहीं चेत रहे। कुछ भवनों के नीचे शोरूम चल रहे हैं। गोदाम बना रखे हैं। हर समय यहां आवाजाही बनी रहती है। अचल सरोवर से सटा हिंदू इंटर कालेज व आसपास के भवनों को भी जर्जर घोषित किया जा चुका है। किसी जर्जर भवन के गिरने से जनहानि हुई तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?

इन क्षेत्रों में जर्जर भवन : ऊपरकोट, कनवरीगंज, रसलगंज, नई बस्ती, रेलवे रोड, मामूभांजा, मदारगेट, सराय सुल्तानी, दुबे का पड़ाव, मानिक चौक, महावीरगंज आदि क्षेत्रों में जर्जर भवन हैं। सबसे अधिक भवन ऊपरकोट स्थित टनटनपाड़ा में हैं। यहा लगभग 14 मकान ऐसे हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। दूसरे नंबर पर चौक बुंदु खां है। यहां एक दर्जन मकान गिरासू भवनों की सूची में हैं। निगम की सूची में ज्यादातर गिरासू भवन घनी आबादी क्षेत्र और मुख्य बाजारों में हैं। यहां हादसे की आशंका बनी रहती है।

इनका कहना है

जर्जरों भवनों को चिह्नित कर नोटिस दिए गए हैं। कुछ भवन नगर निगम ने गिराए भी हैं। पिछले ही दिनों कनवरीगंज में एक भवन ढहाया गया था। कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

- अरुण कुमार गुप्त, अपर नगर आयुक्त

Edited By: Anil Kushwaha