जागरण संवाददाता, अलगीढ़ : डेंगू व बुखार से जिले में हाहाकार मचा हुआ है। गांव व शहरों में लोग बुखार से तप रहे हैं। घर-घर चारपाई पड़ी हुई है। अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने के लिए जगह नहीं हैं। दीनदयाल अस्पताल व मलखान सिंह में बेड फुल हैं। वहीं,गुरुवार को जिले के कई निजी चिकित्सालयों में भी बेड खाली न होने के बोर्ड लगा दिए। जिले में कुल 42 नए डेंगू के मरीजों की पुष्टि हुई है। वहीं, सैकड़ों लोग बुखार से परेशान हैं। तमाम लोगों को समय से इलाज तक नहीं मिल पा रहा है। लोग दिल्ली, आगरा समेत अन्य शहरों में जा रहे हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के अफसर अब भी सब कुछ सही होने का दावा कर रहे हैं।

तीन की मौत, सैकड़ों बीमार

धनीपुर ब्लाक के सिहौर के बाद अब खैर ब्लाक में लक्ष्मणगढ़ी में भी हालात काफी खराब हैं। ग्रामीणों का दावा है कि गांव में डेंगू व बुखार के चलते पिछले तीन दिनों में तीन लोगों की मौत हो चुकी हैं। इसमें एक 80 वर्षीय बुजुर्ग की खैर में ही इलाज कराते हुए मौत हो गई। वहीं, 15 वर्षीय किशोरी ने नोएडा के एक निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया। वहीं, एक विवाहिता की आगरा में मौत हो गई। यह तीनों ही बुखार से पीड़ित थे और प्लेटलेट्स कम थी। वहीं, सौ से अधिक लोग गांव में बीमार पड़े हुए हैं। अधिकतर लोगों को प्लेटलेट्स कम व बुखार की परेशानी हैं। लक्ष्मणगढ़ी के धीरू पहलवान व विनीत सिंह ने बताया कि गांव में एक अस्पताल है, लेकिन यहां पर कोई बैठता नहीं हैं। गुरुवार को ही पहली बार एक टीम आई थी। उन्होंने कहा कि, स्वास्थ्य विभाग को गांव में विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

इस तरह चलाया गया सर्वे

डेंगू नियंत्रण अभियान के तहत गांव व शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभियान चलाया जा रहा है। इसमें जिले भर में कैंप लगाकर 116 लोगों को दवा बांटी गई। वहीं, 30 मलेरिया के टेस्ट एवं 91 घरों का सर्वे किया गया। सरकारी अस्पतालों में डेंगू वार्ड देखे गए। सभी जगह एंटी लार्वा का छिड़काव किया गया। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में सोर्स रिडक्शन की कार्रवाई की। इसमें पला साहिबाबाद, चंदनिया, शक्ति नगर, रामविहार कालोनी, खैर बाईपास में अभियान चलाया गया है। इसमें 1085 घरों का सर्वे हुआ। इसमें 696 कूलर, 1435 कंटेनर एवं अन्य पात्रों की जांच की गई। 21 पात्र धनात्मक पाए गए।

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तीन चिकित्सक समेत 22 स्वास्थ्य कर्मियों का अटेचमेंट खत्म

जासं, अलीगढ़ : बुखार के बढ़ते प्रकोप के चलते सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था चरमराने लगी हैं। सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण क्षेत्र में हो रही है। यहां पर मरीजों को उपचार तक नहीं मिल पा रहा है। अधिकतर मरीज जिला मुख्यालय पर ही भेजे जा रहे हैं। इसका एक कारण देहात क्षेत्र में चिकित्सक व मेडिकल स्टाफ का कम होना है। अधिकतर कर्मी जिला मुख्यालय पर ही अटैच हैं। गुरुवार के अंक में दैनिक जागरण ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस पर अफसर हरकत में आ गए। डीएम के आदेश पर सीएमओ डा. आनंद उपाध्याय ने तीन चिकित्सकों समेत 22 स्वास्थ्य कर्मियों को मुख्यालय से हटाकर उनके मूल तैनाती स्थल पर भेज दिया है। अब यह सभी चिकित्सक अपने तैनाती स्थल पर ही काम करेंगे। सीएमओ डा. आनंद उपाध्याय ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए डीएम व सीडीओ के निर्देश पर अटेचमेंट खत्म किए गए हैं। शुक्रवार को सभी चिकित्सकों के साथ बैठक की। इसमें सभी सीएचसी को 24 घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए। सीएमओ ने स्पष्ट कहा है कि इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। मरीजों को हर समय भर्ती किया जाए।

दीनदयाल अस्पताल

में भेजे चार डाक्टर

डीएम व सीडीओ के निर्देश पर सीएमओ ने अर्बन पीएचसी पर तैनात चार चिकित्सा अधिकारियों को दीनदयाल अस्पताल में संबद्ध किया है। दरअसल, यहां मरीजों के साथ चिकित्सकों की संख्या काफी कम है। मौलाना आजाद नगर पीएचसी पर तैनात डाक्टर इरफान, नगला तिकोना पीएससी पर तैनात डा. मोहसिन बेगमबाग व चिकित्सक पीयूष माहेश्वरी को दीनदयाल में भेजा गया है।

Edited By: Jagran