अलीगढ़, जेएनएन। जिन वस्तुओं को वेस्ट मानकर हम कचरे में फेंक देते हैं, उन्हीं को बेस्ट बनाकर कई बेटियां न सिर्फ आशियाना सजा रहीं, बल्कि इसे आय का स्रोत भी बना लिया है। डिग्री कालेज की इन छात्राओं ने कोरोना संक्रमण काल में समय का बखूबी सदुयोग किया। कुछ ने अपने हुनर को निखारा, तो कुछ अपने घर व पर्यावरण को बेहतर बनाने मे जुट गईं। इंटरनेट मीडिया के जरिए अपनी कारीगिरी की मार्केटिंग भी की। खासकर इंटीरियर के लिए बनाए आइटम की मांग बढ़ी है, आर्डर भी मिल रहे हैं।

ऐसे बनाया वेस्‍ट से बेस्‍ट

कोरोना संकट के चलते मार्च, 2020 में लगे लाकडाउन के दौरान श्रीवाष्र्णेय महाविद्यालय की इन छात्राओं ने अपने हुनर को निखारा था। इसमें साथ दिया कालेज की डा. अनीता वाष्र्णेय ने। वे बताती हैं कि हम अक्सर प्लास्टिक की खाली बोतलें, स्कूटर, बाइक और कार के टायर, टूटा हेलमेट, पानी का टूटा टब या अन्य वेस्ट को बाहर फेंक देते हैं। कभी नहीं सोचते कि इनका सदुपयोग भी हो सकता है। थोड़ी सी लगन हो तो वेस्ट से बेस्ट बनते देर नहीं लगती। छात्राओं ने यही किया। एमए फाइनल की दुर्गेश पाठक, गुंजन शर्मा, बीए द्वितीय वर्ष की पूजा रानी, साक्षी वाष्र्णेय, किरन, मोनिका आदि छात्राओं ने अनुपयोगी वस्तुओं को उपयोगी बनाया। कुछ छात्राओं ने इसे आय का जरिया भी बनाया है, जो कोरोना संकट में अच्छी बात है। छात्राओं ने घर में पुरानी वस्तुओं पर पेङ्क्षटग की है, ताकि ये आकर्षक दिखें। इन छात्राओं के घर पर दरवाजे से लेकर अंदर तक जमीन, दीवार पर उन्हीं की कारीगिरी नजर आती है। कालेज में दिए गए प्रशिक्षण के जरिए छात्राओं ने आपदा का अवसर में बदला है।

इंस्टाग्राम पर मार्केटिंग

एमए की छात्रा दुर्गेश पोट्र्रेट भी बनाती हैं। वह बताती हैं कि उन्होंने सात माह पूर्व इंस्टाग्राम सोशल साइट पर अपना अकाउंट बनाया। जिससे काफी लोग जुड़े हुए हैं। इसी साइट पर अनुपयोगी वस्तुओं से तैयार आइटम के फोटो पोस्ट किए जाते हैं। ईको ब्रिक्स, कुशन, गमले, टिसू पेपर से इंटीरियर के आइटम आदि घर पर तैयार होते हैं। सभी के रेट फिक्स हैं। पसंद आने पर लोग घर से सामान ले जाते हैं। पोट्र्रेट के लिए भी आर्डर मिलने लगे हैं। एक पोट्र्रेट का 500 रुपये चार्ज है।