अलीगढ़ : बरसात का असर शहर की स्ट्रीट लाइट पर भी पड़ा है। शहर की कॉलोनियों और मोहल्लों में ज्यादातर स्ट्रीट लाइट खराब हो गई हैं। शाम ढलते ही अंधेरा छाने लगता है। इससे शहरवासियों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर की गलियां शाम ढलते ही दूधिया लाइट से रोशन होने का ख्वाब अभी फाइलों तक ही सीमित है। शाम को जब लोग उम्मीद करते हैं कि लाइट जलेगी पर जलती नहीं। हकीकत यह है कि लाखों रुपये हर महीने खर्च करने के बावजूद हालात अच्छे नहीं हैं।

31 हजार से अधिक प्रकाश बिंदु

नगर निगम का दर्जा मिलने के बाद शहर का रिहायशी और व्यावसायिक इलाका बढ़ा है। यहां स्ट्रीट लाइट की जरूरत बढ़ी। 70 वार्ड में साढ़े दस लाख की आबादी पर 31 हजार 418 प्रकाश बिंदु हैं। जो स्ट्रीट लाइट एलईडी में बदली गई हैं, उसमें 40 फीसद खराब बताई जाती हैं। नए सीमांकन के बाद 19 गांव बढ़ने पर पांच लाख आबादी और बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि इस आबादी के लिए 5500 स्ट्रीट लाइट की और जरूरत पड़ेगी। अभी तक हम 70 वार्ड को स्ट्रीट लाइट संतृप्त नहीं कर पाए हैं।

दूधिया रोशनी की हकीकत

दूधिया प्रकाश लिए इनर्जी एफिशिएंसी सर्विस लिमिटेड(इइएसएल) कंपनी से समझौता हुआ कि शहर में जितनी सोडियम लाइट लगी हुई हैं, उसके बदले एलईडी लाइट लगाई जाएंगी। लेकिन, भुगतान न होने के कारण यह करार बीच में टूट गया। सिर्फ आधी लाइट ही बदल पाईं। नगर निगम को अधिक बिजली फूंकने वाली सोडियम लाइट के बदले एलईडी से हुई बचत के रूप में कंपनी को भुगतान करना था जो कि बीच में रुक गया। अब बकाया छह करोड़ के सापेक्ष एक करोड़ रुपये भुगतान होने पर 15 हजार एलईडी लाइट और बदली जाएंगी।

रात में लगता है डर

सुरक्षा बिहार के अनुपम सिंह बताते हैं कि स्ट्रीट लाइट न होने से रात को अंधेरा रहता है। डर लगने के कारण घर से बाहर नहीं निकल पाते है। अरविंद बताते हैं कि बारिश के दिनों में तो और बुरा हाल हो जाता है। अंधेरे में निकलना मुश्किल हो जाता है।

शिकायत का असर

भुजपुरा के रहने वाले शफीक अहमद बताते हैं कि जो स्ट्रीट लाइट लगी हैं, वह जलती नहीं है। शिकायत करने का भी कोई असर दिखाई नहीं देता है। शाहजमाल के रहने वाले नाजिम अंसारी बताते हैं कि बारिश के दिन में यहां वैसे ही पानी भर जाता है। अंधेरे में बच्चे और महिलाएं तो निकलती नहीं है।

कंपनी को भेजा रिमाइंडर

पथ प्रकाश के अजीत राय बताते हैं कि कंट्रोल रूम व अन्य माध्यमों से आने वाली शिकायतों का निस्तारित किया जाता है। नई एलईडी लाइट लगवाने के लिए कंपनी को रिमाइंडर भेजा जा रहा है।

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पुरानी लाइटों का राज अभी भी दफन

बिजली की बचत कम करने के लिए सोडियम लाइट से एलईडी लाइट बदलने के काम में धांधली की बू आ रही है। इन लाइटों को लेकर अभी तक नगर निगम का कोई भी अफसर संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहा है। पुरानी लाइट के बदले लगाई नई एलईडी लाइट भी नहीं जल पा रही हैं।

शर्त पर हुआ था अनुबंध

शहर में 31 हजार 418 प्रकाश बिंदु हैं। इन पर सोडियम लाइट के स्थान पर एलईडी लगाने के लिए ईईएसएल कंपनी से नगर निगम का इस शर्त पर पर अनुबंध हुआ था कि एलईडी लगाने से जो बिजली की बचत होगी उतने बिल का भुगतान कंपनी को नगर निगम करेगा। लेकिन, यह करार ज्यादा दिन नहीं चला, कंपनी लगभग 16000 लाइट ही बदल पाई। आज भी 15000 लाइट की दरकार है। कंपनी का छह करोड़ के बदले नगर निगम एक करोड़ का भुगतान कर चुका है।

मुख्य मार्गो से बदलीं लाइट

बदली गई एलईडी में मुख्य मार्गो को छोड़ दिया जाए तो गलियों की 40 फीसद लाइटें खराब हैं। जो सोडियम लाइट उतारी गई थीं, उनको स्टोर में रखवाया गया। यहां से 12000 लाइट गायब होने का मामला प्रकाश में आया। जब एलईडी लाइट नहीं मिली तो कुछ पुरानी लाइटों को उनके स्थान पर लगाया गया। हालत यह हैं कि नगर निगम के पास नई लाइट नहीं हैं, वह जुगाड़ से काम चला रहा हैं। पथप्रकाश विभाग में गड़बड़ी पर एक बाबू को पहले ही हटाया जा चुका है।

Posted By: Jagran