अलीगढ़[संदीप सक्सेना]। पूरी दुनिया कोरोना वायरस संकट से कराह रही है। गनीमत है कि भारत में यह महामारी अभी स्टेज टू पर है, लेकिन एक दिन में 200 नए संक्रमित मरीजों का मिलना कोरोना वायरस के थर्ड स्टेज में बढऩे की ओर संकेत हो सकते हैं। कोविड-19 पर कंट्रोल करने के उद्देश्य से ही देशभर में लॉकडाउन किया गया, लेकिन शनिवार को देश की राजधानी दिल्ली में आनंद विहार बस अड्डे पर जिस तरह से लाखों प्रवासी मजदूर बेहद कम फासले पर इकट्ठा हुए और वहां से जिस तरह से गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़ के रास्ते अपने घरों के लिए निकले हैं वह आने वाले समय के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

अभी भी वक्त है कि हम अलर्ट हो जाएं। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए एएमयू के विशेषज्ञ ने सात सुझाव दिए हैं। इन सुझावों पर सख्ती अमल हो तो कोरोना वायरस का संक्रमण थर्ड स्टेज पर आने से रुक जाएगा।

थूक के कणों से भी फैलता है कोरोना वायरस

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के जेएन मेडिकल कॉलेज में टीबी एंड चेस्ट डिपार्टमेंट के चेयरमैन प्रो.राकेश भार्गव ने दैनिक जागरण से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा भगवान करे कि कोरोना वायरस का संक्रमण अति शीघ्र खत्म हो जाए, क्योंकि इस वायरस के समुदाय में फैलने पर न तो इसे हम रोक पाएंगे और न मरीजों को उम्दा इलाज दे पाएंगे। यह वायरस खांसने, छींकने या छूने से ही नहीं, बल्कि आमने-सामने खड़े होकर बात करते समय थूक के कणों के जरिए भी संक्रमण फैलाता है। इसलिए सोशल डिस्टेसिंग और लॉकडाउन का सख्ती से पालन करना ही होगा। हालांकि, पीएम नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार ने इसके लिए साहसिक और सख्त कदम उठाए भी हैं।

शारीरिक दूरी बनाए रखना जरूरी

प्रो. भार्गव ने बताया कि लोगों को लॉकडाउन की गम्भीरता को समझना चाहिए, जागरूक होते हुए भी लोग वे वजह सड़क पर निकल रहे हैं। फिलहाल कोरोना वायरस से लडऩे के लिए बड़ा हथियार लॉकडाउन व एक-दूसरे से शारीरिक दूरी बनाए रखना है। इससे निबटने के लिए एएमयू के जेएन मेडिकल में भी इंतजाम पुख्ता हैं।

आगरा, मथुरा की तुलना में अलीगढ़ ज्यादा सुरक्षित

प्रो.राकेश भार्गव का मानना है कि कोरोना वायरस का खतरा अन्य शहरों के मुकाबले अलीगढ़ में कम है। पर्यटक स्थलों पर इसका अधिक खतरा है। एएमयू को छोड़कर अलीगढ़ में ऐसा कोई पर्यटन स्थल नहीं है, जिसे देखने के लिए बाहर से पर्यटक आते हों, इसलिए आगरा व मथुरा की तुलना में अलीगढ़ ज्यादा सुरक्षित है।

इटली से ज्यादा भारत में है घनी आबादी, दो बार गए इटली

प्रोफेसर राकेश भागर्व वर्ष 1993 से लेकर अब तक छह बार जेएन मेडिकल कॉलेज में टीबी एवं चेस्ट डिपार्टमेंट के चेयरमैन रहे हैं। वर्तमान में भी चेयरमैन हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल एजुकेशन कंटीन्यू (सीएमई) के तहत एएमयू की ओर से दो बार इटली जा चुके हैं। वहां सेमिनार में शामिल हो चुके हैं। वहां भी भारत जैसी घनी आबादी है, लेकिन भारत में घनी आबादी कुछ ज्यादा है। इसलिए यहां खतरा अधिक हो सकता है। इटली के मुकाबले भारत में चिकित्सकीय सुविधाएं कम हैं। भारत सरकार ने पहले ही सख्त कदम उठा लिए हैं, जोकि इटली में नहीं उठाए गए। चीन के डॉक्टर की बात को यूरोपीय देशों ने गंभीरता से नहीं लिया। अब इसका परिणाम सामने आ रहा है।

कारगर है दवा हाईड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन

प्रोफेसर राकेश भार्गव का कहना है कि कोरोना वायरस संकट से ज्यादा नहीं घबराने की जरूरत नहीं है। मुख्य बचाव ही इसका उपचार है, लेकिन खुशखबरी यह है कि इससे बचाव के लिए हाईड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा का प्रयोग किया जा सकता है। 23 मार्च को इसका ऐलान इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) द्वारा गठित नेशनल टास्क फोर्स फॉर कोविड-19 ने कर दिया है। दवा की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने बुधवार को ही निर्यात पर रोक लगा दी थी। इस दवा को डॉक्टर की सलाह के बाद ही दिया जा सकता है।

 

AMU में फ्लू एंड फीवर ओपीडी

प्रोफेसर राकेश भार्गव ने बताया कि जेएन मेडिकल कॉलेज की पुरानी ओपीडी वाले में भवन में रोजाना सुबह आठ से रात दस बजे तक फ्लू एंड फीवर ओपीडी चल रही है। इस ओपीडी में टीबी एंड चेस्ट, ईएनटी, मेडिसिन एवं माइक्रोबॉयलोजी डिपार्टमेंट के चिकित्सक शामिल हैं। इसमें सिर्फ बुखार वाले मरीजों का उपचार किया जा रहा है। कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण मिलने पर मरीज को भर्ती कर लिया जाता है। जांच के लिए अलग से मशीन है। संदिग्ध मरीजों के स्टिक के माध्यम से नाक व गले से सैंपल लिए जाते हैं। बच्चों की ओपीडी भी शुरू कर दी गई है।

ये हैं कोरोना वायरस के लक्षण

प्रोफेसर ने बताया कि बुखार आना, गले में सूजन, सांस की परेशानी, नाक से पानी बहने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

इन सुझावों से थर्ड स्टेज पर आने से रुक जाएगा कोरोना वायरस का संक्रमण

1- यह वायरस खांसने, छींकने या छूने के साथ-साथ आमने-सामने खड़े होकर बात करते समय थूक के कणों के जरिए भी फैलाता है। इसलिए एक-दूसरे से दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है।

2- पड़ोसी के घर भी न जाएं। जहां भी भीड़ हो वहां जाने से बचें। जरूरी न हो तो अस्पतालों में कतई न जाएं। बाहर से आकर साबुन से हाथ धोएं।

3- साबुन से 20 सैकेंड तक हाथों को बार-बार रगड़कर धोएं।

4- खांसते व छींकते वक्त चेहरे को रूमाल या बाजू से ढांक लें।

5- अपनी आंख, नाक व मुंह को बिना साफ किए हाथों से न छुएं।

6- लक्षण दिखने पर खुद को घर में आइसोलेट करें या स्वास्थ्य विभाग को जानकारी देंं।

7- घर से बाहर जाएं तो किसी चीज छुए नहीं। मास्क जरूर लगाएं।

Posted By: Sandeep Saxena

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