अलीगढ़, जेएनएन : मुनाफे के फेर में मिलावट का बाजार फिर सज गया है। मिलावटी दूध व उससे बनी खाद्य वस्तुएं ही नहीं, मिर्च-मसालों और दालों में भी मिलावट हो गई है। त्योहार नजदीक देख मिलावटी खाद्य तेल के कारोबारी सक्रिय हो गए हैं। बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे अधिकांश स्पेलरों पर मिलावटी तेल का खेल धड़ल्ले से शुरू हो गया है। दैनिक जागरण ने इसके लिए जन जागरूकता अभियान शुरू किया है। 

150 से ज्यादा स्पेलर, मिलावटी तेल का कारोबार 

एक अनुमान के मुताबिक 150 से ज्यादा स्पेलरों पर तेल पिराई व मिलावटी खाद्य तेल तैयार करने का काम हो रहा है। इनमें से 25 फीसद के पास भी एफडीए से लाइसेंस नहीं। सूत्रों की मानें तो सरसों के तेल में(राइसब्रान) धान की भूसी का तेल बहुतायत में मिलाया जाता था। अब पाम ऑयल मिलाया जाता है। पाम आयल तेल से सस्ता होने से दुकानदार को अधिक मुनाफा होता है। राइसब्राउन ऑयल का भी नकली सरसों का तेल बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। इन तेलों में रंग, खुशबू और मिर्च का अर्क, सिंथेटिक एलाइल आइसोथायोसाइनेट, प्याज का रस व फैटी एसिड की मिलावट करते हैं। 


ऐसे करें पहचान 

सरसों का तेल: स्वाद तीखा व कड़वा होता है। शुद्ध सरसों का तेल जमता नहीं है। मिलावटी तेल, खासकर पामोलिन मिले तेल को फ्रिज में रखने पर वनस्पति की तरह जमने लगता है।  तेल के नमूने में गाढ़ा यानी सांद्र नाइट्रिक एसिड मिलाकर मिश्रण को खूब हिलाएं। यदि लाल-भूरे रंग की परत दिखाई दे, तो यह मिलावटी होने का संकेत है। 

देशी घी

एक चम्मच घी में एक चम्मच हाइड्रोक्लोरिक एसिड और एक चुटकी चीनी मिलाएं। अगर घी का रंग लाल हो जाए तो इसमें वनस्पति घी की मिलावट है। आयोडीन ङ्क्षटचर की कुछ बूंद मिलाने पर यदि रंग नीला हो जाए तो घी में आलू, शकरकंदी या अन्य स्टार्च मिलाया गया है। थोड़ा सा घी हाथों में रगड़ें। इसे करीब 15 मिनट बाद सूंघकर देखें अगर खुशबू आनी बंद हो जाए तो मान लीजिए कि यह मिलावटी घी है।


मिलावटी तेल ज्यादा घातक 

जिला अस्पताल स्थित आयुष ङ्क्षवग के प्रभारी चौ. नरेंद्र ङ्क्षसह बताते है कि मिठाई व मिर्च मसालों से ज्यादा घातक मिलावटी तेल है। केमिकल व ग्लिसरीन युक्त तेल से लीवर संबंधी रोग की आशंका रहती है। एल्डीहाइट, पालीमर्स जैसे तत्व बहुत नुकसानदेह हैं। फैटी एसिड हृदय की धमनियों में जमता है। इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। दूसरी मिलावटी वस्तुओं के दुष्प्रभाव का पता देरी से चलता है, मगर मिलावटी तेल में पके पकवान खाते ही शरीर का मोटोबॉलिज्म सिस्टम (पाच्य क्रिया) गड़बड़ाने से तुरंत पेट खराब हो जाता है। ऐसे में खुले तेल का बिल्कुल इस्तेमाल न करें। 

इनका कहना है

मिलावटी खाद्य पदार्थों पर रोक के लिए अभियान चलाया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा टीमें बराबर छापेमारी कर नमूने भर रही हैं। स्पेलरों से भी नमूने भरे जाएंगे। लोगों से अपील है कि यदि मिलावट का शक हो तो दुकानदार की शिकायत करें।  

- सर्वेश मिश्रा, अभिहित अधिकारी 

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