जासं, अलीगढ़ : कोरोना के साथ ब्लैक फंगस के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। सूबे के कई जिलों में इन मामलों की पुष्टि हो चुकी हैं। अच्छी खबर ये है कि अपने जिले में अभी किसी मरीज में इस बीमारी की पुष्टि नहीं हुई है। शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग पहले से ही अलर्ट हो गया है। सीएमओ ने सभी कोरोना अस्पतालों को आक्सीफ्लोमीटर का पानी रोज बदलने के निर्देश दिए हैं। जानकार बताते हैं कि इस बीमारी से अधिक खतरा डायबिटिक मरीजों को हैं। डायबिटीज पीड़ित किसी भी तरह की परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सकों को दिखाएं।

शासन की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि कोरोना के साथ अब कुछ लोग म्यूकोरमाइकोसिस नाम के फंगल इंफेक्शन की चपेट में भी आ रहे हैं। आम बोलचाल की भाषा में ब्लैक फंगस के नाम से जाना जाता है। यह दुर्लभ इंफेक्शन है, जो व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर होता है। शुगर के मरीजों को यह इंफेक्शन ज्यादा गंभीर होता है। शासन ने सभी जिलों को इससे निपटने के लिए कोरोना अस्पतालों में आक्सीफ्लोमीटर का पानी रोज बदलने के निर्देश दिए हैं।

अभी तक ब्लैक फंगस का मरीज नहीं मिला : सीएमओ डॉ. भानु प्रताप कल्याणी ने बताया कि जिले में अब तक किसी मरीज में ब्लैक फंगस की पुष्टि नहीं हुई है। शनिवार को एक निजी अस्पताल में विष्णुपुरी निवासी बुजुर्ग की ब्लैक फंगस से मौत होने की खबर मिली थी। इसकी जांच कराई गई तो ऐसा कोई मरीज नहीं मिला है। डायबिटिक लोगों के लिए यह ज्यादा खतरनाक है। ऐसे मरीज अपने शुगर पर नियंत्रण रखें।

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ब्लैक फंगस के इलाज को नहीं है कोई अस्पताल

सीएमओ ने बताया कि ब्लैक फंगस के मरीजों को लेवल थ्री अस्पताल में इलाज मिलता है। जिले में इस लेवल का कोई अस्पताल नहीं हैं। इस बीमारी के इलाज में डाक्टरों की पूरी टीम लगती है। आगरा व सैफई में ही इसका इलाज मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग लोगों को इसके प्रति जागरूक करेगा। यह संक्रमण वाली बीमारी नहीं है। एक दूसरे को छूने से नहीं फैलती है।

Edited By: Jagran