अलीगढ़, जागरण संवाददाता। भाजपा ने शहर विधानसभा क्षेत्र से टिकट घोषित न करके सियासी गर्माहट पैदा कर दी है। हर किसी की नजर इस समय शहर सीट पर है। यहां तक शहर सीट पर विपक्ष भी निगाहे गढ़ाए हुए है। माना जा रहा है कि 22 साल पुराने मामले में मौजूदा विधायक संजीवर राजा को दो साल की सजा मिलने के चलते टिकट को रोक दिया गया है। इस मामले में 17 जनवरी को कोर्ट में तारीख है। भाजपा कार्यकर्ताओं को शनिवार को टिकट की घोषणा होने की उम्मीद थी। इसीलिए दोपहर एक बजे के करीब सभी टीवी के सामने बैठे थे। मगर, शहर सीट से प्रत्याशी की घोषणा न होने पर समर्थक मायूस हो गए। इससे शहर सीट से अन्य दावेदारों की भी सक्रियता बढ़ गई है। हालांकि, चर्चा है कि संजीव राजा को दो साल की सजा मामले के चलते टिकट की घोषणा नहीं हुई है।

यह है मामला

शहर सीट पर वर्तमान विधायक को थाना बन्नादेवी क्षेत्र में मारपीट व धमकी देने के 22 साल पुराने मामले में 18 नवंबर 2021 को एडीजे चार की अदालत ने दो साल की सजा सुनाई थी। हालांकि विधायक के अधिवक्ता ने आदेश आने के बाद अदालत में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दायर किया था। तीन साल से कम सजा होने के चलते अदालत ने जमानत अर्जी मंजूर करते हुए विधायक को रिहा कर दिया था। संजीव राजा ने इस मामले में हाईकोर्ट में स्टे के लिए अपील दायर कर रखी है। 17 जनवरी को सुनवाई हैं। संजीव राजा का कहना है कि एक-दो दिन में पार्टी टिकट घोषित कर देगी।

वकील बोले, लंबित है केस तो मिल सकता है टिकट

कानून विशेषज्ञ व वरिष्ठ अधिवक्ता रामबाबू शर्मा का कहना है कि सीआरपीसी के सेक्शन 389 के तहत अगर किसी कन्विक्शन (फैसले) पर अपील हो गई है और उसे स्वीकार कर लिया गया है तो वह केस सुनवाई के दौरान फिर से पहले की तरह बहस की स्थिति में आ जाता है। संबंधित व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं कहा जा सकता, जब तक फाइनल फैसला न आ जाए। अगर सजा सस्पेंड करने की याचिका स्वीकार हो गई है, तब भी यही स्थिति रहेगी। अधिवक्ता अनिल शर्मा का भी कहना है कि अगर फैसले के खिलाफ अपील स्वीकार हो चुकी है तो इसे सजा की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।

जल्द ही पार्टी शहर सीट से भी प्रत्याशी घोषित कर देगी। प्रत्याशी घोषित होते ही हम सभी पूरी दमदारी से जुट जाएंगे। पूरी टीम प्रत्याशी को मिलकर जिताएगी। प्रदेश नेतृत्व जल्द ही इस पर निर्णय लेगा।

डा. विवेक सारस्वत, महानगर अध्यक्ष भाजपा

Edited By: Sandeep Kumar Saxena