अलीगढ़ (जेएनएन)।  अलीगढ़ संसदीय क्षेत्र से भाजपा ने सांसद सतीश कुमार गौतम पर फिर विश्वास जताया है। भाजपा के अलीगढ़ के इतिहास में पूर्व सांसद शीला गौतम के बाद सतीश कुमार गौतम दूसरे व्यक्ति हैं, जिन्हें पार्टी ने दोबारा मौका दिया है। सतीश गौतम के मैदान में आने के बाद से अलीगढ़ में त्रिकोणीय संघर्ष होना निश्चित है। उधर, सतीश गौतम के टिकट की घोषणा होते ही विद्यानगर स्थित उनके कार्यालय पर समर्थकों का जमावड़ा लग गया। खुशी में कार्यकर्ताओं ने जमकर आतिशबाजी की। होली में दीपावली जैसा नजारा दिखाई दिया। अबीर-गुलाल भी जमकर उड़े। मिठाई भी बांटी गई। वहीं, राज पैलेस के करीबी माने जाने वाले ठा. श्यौराज सिंह समेत कई दावेदारों को मौका न मिलने से मायूसी छा गई। शाम को होली का जश्न उनका फीका हो गया। वहीं सतीश गौतम को टिकट दिए जाने का विरोध भी शुरू हो गया है। शुक्रवार की सुबह राज्यपाल कल्याण सिंह से मिलने उनके आवास राज पैलेस पहुंचे सतीश गौतम को चौकीदारों ने अंदर नहीं घुसने दिया। कल्याण सिंह व उनके पुत्र राजू भैया उनसे नहीं मिले। गेट से ही गौतम को निराश लौटना पड़ा। कल्याण सिंह के समर्थकों ने सतीश गौतम के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।

गांव सढ़ा के हैं गौतम

सांसद सतीश कुमार गौतम (48) मूलरूप से गौंडा ब्लॉक क्षेत्र के गांव सढ़ा के रहने वाले हैं। यह हाथरस संसदीय क्षेत्र में आता है। वह नोएडा में राजनीति में सक्रिय रहे। भाजपा में कई पदों पर रहने के बाद वर्ष 2014 में उनका टिकट घोषित हुआ था और उन्हें दो लाख से अधिक मतों से जीत मिली थी। तब माना जा रहा था कि कल्याण सिंह का उनपर आशीर्वाद था। हालांकि, इधर कुछ दूरियां बढ़ीं थीं। इसके बाद से चर्चा होने लगी थी कि सतीश गौतम का टिकट कट जाएगा। पार्टी कल्याण सिंह के रिश्तेदार ठा. श्यौराज सिंह, पूर्व सांसद शीला गौतम के पुत्र राहुल गौतम, पुत्रवधू नमिता गौतम या फिर राजेश भारद्वाज को मौका दे सकती है। मगर, संगठन में पकड़ बनाए रखने वाले सतीश कुमार गौतम को ही पार्टी ने दोबारा मौका दिया। इससे माना जा रहा है कि राज पैलेस को झटका लगा है। उल्लेखनीय है कि पूर्व सांसद शीला गौतम 1991 से लगातार चार बार सांसद रही थीं। सांसद सतीश कुमार दूसरे व्यक्ति हैं, जिन्हें पार्टी ने दोबारा मौका दिया है। सतीश गौतम के मैदान में आने के बाद से अलीगढ़ में त्रिकोणीय मुकाबला होना निश्चित हो गया है। यहां से सपा-बसपा-रालोद के गठबंधन से अजीत बालियान मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस ने 2004 में सांसद रहे चौधरी बिजेंद्र सिंह को मौका दिया है। दोनों प्रत्याशी जाट समाज से हैं, जबकि सतीश गौतम अकेले ब्राह्मण प्रत्याशी हैं।


कार्यालय पर मना जश्न, जमकर आतिशबाजी
सतीश गौतम गुरुवार शाम को दिल्ली स्थित अपने आवास पर थे। टिकट की घोषणा होते ही कार्यकर्ताओं ने उन्हें मिठाई खिलाकर बधाई दी। उधर, अलीगढ़ में विद्यानगर स्थित कार्यालय पर समर्थकों का जमावड़ा लग गया। सांसद प्रवक्ता संदीप चाणक्य सबसे पहले कार्यालय पहुंचे। उसके बाद धीरे-धीरे समर्थकों का जुटना शुरू हो गया। कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी शुरू कर दी। मोदी और योगी के तस्वीर को लेकर सतीश गौतम जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। अबीर-गुलाल से सभी को रंग दिया। जिला महामंत्री गौरव शर्मा, डा. राजीव अग्रवाल, डॉ. निशित शर्मा, चंद्रमणि कौशिक, प्रतीक चौहान, अर्पित तिवारी, पवन खंडलेवाल, मुकेश जिंदल, मनोज अग्रवाल आदि कार्यकर्ता कार्यालय पहुंचकर जश्न में शामिल हुए।


आज जट्टारी पर होगा स्वागत
सांसद सतीश कुमार गौतम शुक्रवार को सुबह दिल्ली से चलेंगे। सुबह नौ बजे जट्टारी में कार्यकर्ता उन्हें आगवानी करेंगे। यहां से काफिले के साथ वो अलीगढ़ पहुंचेंगे।


जीवन परिचय
सांसद सतीश कुमार गौमत मूलरूप से इगलास तहसील क्षेत्र के गांव सढ़ा के रहने वाले हैं। हाईस्कूल तक शिक्षा प्राप्त की है। डिप्लोमा इन डेयरी मैनेजमेंट नोएडा में उनका दूध का व्यवसाय है। उनका परिवार वहीं रहता है। राजनीतिक कैरियर भी गौतमबुद्ध नगर का ही रहा है। भाजपा में जिला मंत्री, जिला अध्यक्ष व्यापार प्रकोष्ठ के पद पर रह चुके हैं। 2014 में टिकट मिलने के बाद से अलीगढ़ से नाता जुड़ गया। सांसद सतीश गौतम तीन भाई दो बहन हैं। इनके बड़े भाई का हाल ही में निधन हो चुका है।
 

 

पिछली बार मिले पांच लाख से अधिक वोट

बात लोकसभा चुनाव-2014 की है। यूपीए की लगातार दस साल की सरकार के बाद अचानक ऐसी लहर चली कि सपा और बसपा के प्रत्याशी मिलकर भाजपा प्रत्याशी के बराबर वोट नहीं ले पाए। मगर इस बार इस बार तीन दलों के गठबंधन में रालोद भी शामिल है। पांच साल बाद परिस्थिति बदली हैं, इसलिए इस बार सबकी नजर लगी हुई है।

सांसद सतीश गौतम को मिले पांच लाख 14 हजार 622 वोट

भाजपा से प्रत्याशी सतीश कुमार गौतम को पांच लाख 14 हजार 622 वोट लेकर नंबर एक पर रहे थे। दूसरे नंबर पर रहे बसपा के अरविंद कुमार सिंह को दो लाख 27 हजार 888 मिले थे। सपा के प्रत्याशी जफर आलम को दो लाख 26 हजार 284 वोट मिले थे। सपा और बसपा के प्रत्याशी के वोट मिलाए जाएं को चार लाख 54 हजार 172 वोट मिले। सपा और बसपा के वोट मिलाकर भाजपा के 60 हजार 450 वोट अधिक मिले है। कांग्र्रेस प्रत्याशी 62 हजार 674 वोट लेकर चौथे नंबर पर रहे।

सोशल मीडिया पर खूब रहे चर्चित

 सूचना कैसी भी हो, एक-दूसरे तक तेजी से पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का जवाब नहीं। यूथ हो या फिर बुजुर्ग, सभी दिनभर अपने मोबाइल फोन पर नई खबरें व जानकारियां तलाशते मिल जाते हैं। इसका उपयोग राजनीति में भी कम नहीं। ट्वीटर, फेसबुक, इंस्टाग्र्राम  व वाट्सअप पर जनसभा व सम्मेलन की सूचनाएं ही नहीं, विरोधियों पर वार तक के लिए भाजपा सांसद सतीश गौतम तो एजेंसी का सहारा ले रहे हैं। वे लंबे समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, ताकि सोशल मीडिया के जरिए प्रचार-प्रसार में कोई कमी न हो। इस पर उनके सियासी तीर खूब चर्चाओं में रहे हैं।

एक्टिविस्ट को दी जिम्मेदारी

विद्यानगर स्थित कैंप कार्यालय पर भी सोशल मीडिया एक्टिविस्ट को रखा है, जिसकी जिम्मेदारी नोएडा की एजेंसी को नियमित रूप से सांसद के कार्यक्रमों से संबंधित तस्वीरें, वीडियो व भाषण-बयान आदि सामग्र्री उपलब्ध कराने की है। एजेंसी उसे आकर्षक ढंग से समायोजित कर एकाउंट पर शेयर करती है। एजेंसी यह भी बताती है कि कब क्या भेजना है? बतौर सांसद इस पर करीब दो लाख रुपये हर माह खर्चा हो जाता है।

 डेढ़ लाख से ज्यादा फॉलोवर्स

सांसद के फेसबुक पेज पर 62000 से ज्यादा फॉलोवर्स हैं। फेसबुक के मुख्य एकाउंट पर फॉलोवर्स की संख्या 24 हजार, ट्वीटर पर 12500 व इंस्टाग्र्राम पर 3200 पार कर गई है। अन्य साइट्स पर ही एकाउंट हैं। इन एकाउंट पर सांसद की सभी जनसभाएं, भाषण, विकास कार्यों के उद्घाटन व अन्य कार्यक्रम की नियमित तस्वीरें-वीडियो शेयर की जाती हैं। एएमयू में जिन्ना की तस्वीर का मुद्दा हो या राजा महेंद्र प्रताप का जन्मदिवस का, तिरंगा यात्रा निकाले जाने पर बहस हो या फिर ङ्क्षहदुत्व को लेकर उनके बयान, सोशल मीडिया के जरिए खूब चर्चित हुए।

प्रधानमंत्री का भी सहारा

सांसद के सोशल मीडिया एकाउंट पर भाजपा और खुद अपनी छवि चमकाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रमों, भाषणों व बयानों का भी खूब सहारा लिया है। उनकी वॉल पर नजर डालें तो हर दूसरी पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या फिर केंद्र सरकार की योजनाएं व उपलब्धियां ही ज्यादा होती हैं।

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Posted By: Mukesh Chaturvedi