अलीगढ़ : श्रीमद्भागवत कथा और श्रीराम कथा मानव कल्याण के साथ हमें सत्य के मार्ग पर चलने की सीख देती हैं। मनुष्य को सही रास्ते पर चलने के लिए दोनों कथाओं का समय-समय पर अनुसरण करते रहना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था कि जो मुझे सच्चे मन से याद करेगा। मैं हमेशा के उसके साथ रहूंगा। इसलिए मनुष्य को सत्य के मार्ग पर चलने के साथ अपना मन भी शुद्ध रखना चाहिए। यह बातें शनिवार को गांव कलूपुरा में श्री सीताराम बाबा के आश्रम पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में भजन कुटी आश्रम वृंदावन से पधारे आचार्य श्री गोपाल महाराज ने प्रवचन के दौरान कहीं। पांचवें दिन की कथा में उन्होंने श्रीकृष्ण जन्म की लीला का वर्णन किया। कथा में बीच-बीच में आचार्य द्वारा गाए गए भजनों पर महिलाएं नृत्य करने को मजबूर हो गई। परीक्षत की भूमिका शंकरलाल बघेल व उनकी पत्नी रामवती देवी ने निभाई। 12 जुलाई से भव्य कलशयात्रा के साथ शुरू हुई भागवत कथा का समापन बुधवार को विशाल भंडारे के साथ होगा। कथा में मनवीर सिंह बघेल, कैलाश सिंह बघेल, श्रीपाल सिंह बघेल, राकेश कुमार बघेल, सोनपाल सिंह बघेल, महेश चंद्र बघेल, खेम सिंह बघेल, लता बघेल, राजवती देवी, काव्या बघेल, ज्ञानवती देवी, गुनगुन बघेल, खुशबू, कविता, नीलम बघेल, चारू बघेल, प्रेमपाल सिंह इंजीनियर, रामकुमार बघेल, रवेंद्र कुमार, अमित कुमार, रवि प्रकाश बघेल, रामप्रकाश बघेल, सत्यप्रकाश, कलियान सिंह, बंटी, हरप्रसाद सिंह, अमित बघेल, राकेश बघेल, आशीष बघेल, प्रमोद बघेल, सोनू, प्रशांत, बीरेंद्र सिंह आदि थे।

प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व निकाली भव्य कलश यात्रा

संसू, विजयगढ़ : नगर के प्राचीन मंदिर हनुमान बगीची पर मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व नगर में शिव भक्तों ने शिव परिवार का नगर भ्रमण एवं कलश यात्रा निकाली, जिसमें नगर के लोगों ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया। कलश यात्रा हनुमान बगीची से प्रारंभ होकर कस्बा के मुख्य बाजार से गुजरती हुई हनुमान मंदिर प्रांगण में पहुंची। यात्रा का जगह-जगह नगर वासियों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। जलपान भी कराया। भक्ति संगीत की ध्वनि पर जमकर नृत्य किया। कलश यात्रा के बाद प्राचीन मंदिर में भगवान शिव परिवार की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा की गई, जो पंडित राजकुमार शर्मा के सानिध्य में हवन यज्ञ पूजन कार्यक्रम के साथ संपन्न किया गया। सोमवार को विशाल भंडारा होगा। इस अवसर पर विनोद कुमार वाष्र्णेय, महेश चंद्र, केशव देव चौबे, मोहित वाष्र्णेय, दिनेश चंद्र वाष्र्णेय, श्याम बिरला, कपिल वाष्र्णेय, मुरारी लाल वाष्र्णेय आदि थे।

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