संतोष शर्मा, अलीगढ़ : फास्ट फूड मोटापा बढ़ाने के साथ जबड़ा और अक्ल दाढ़ का भी दुश्मन बन गया है। इस तरह के खाद्य में चबाने की कसरत न होने से जबड़ा और अक्ल दाढ़ का ठीक से विकास नहीं हो रहा। अक्ल दाढ़ तो टेढ़ी-मेढ़ी भी इसी कारण हो रही है। सबसे ज्यादा युवा वर्ग प्रभावित हो रहा है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के डेंटल कॉलेज में हुए शोध में यह तथ्य सामने आए हैं।

5030 मरीजों पर किया शोध

यह शोध डेंटल कॉलेज के ओरल एंड मैग्जीलोफेशियल सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर गुलाम सरवर हाशमी ने किया है। इस तरीके के शोध पहले कम ही हुए हैैं। दांत की पीड़ा वाले कुल 5030 मरीजों को शोध में शामिल किया। इसमें 134 मरीज अक्ल दाढ़ की समस्या से पीडि़त मिले, यह बड़ी संख्या मानी जा सकती है। 13 फरवरी को इंटरनेशनल ओरल एंड मैग्जीलोफेशियलसर्जरी डे की पूर्व संध्या पर उन्होंने शोध परिणामों की जानकारी दी।

134 मरीजों की दाढ़ टेढ़ी-मेढ़ी

डेंटल कॉलेज में 12 अप्रैल 2018 से 29 जनवरी 2020 तक आने वाले मरीजों को शोध में शामिल किया। पाया गया कि 134 मरीजों में अक्ल दाढ़ टेढ़ी-मेढ़ी निकलने के साथ जबड़े में फंसी हुई थीं। यह स्थिति जबड़ा, पड़ोस के दांत व नसों में खिंचाव पैदा करती है। दोनों ओर की अक्ल दाढ़ के सही जगह न होने से खान-पान के समय गाल कट जाता है, जिससे संक्रमण का भी खतरा रहता है। 

खानपान भी मुख्य वजह

डॉ. गुलाम सरवर हाशमी ने बताया कि ऐसे केसों में जबड़ा छोटा रह जाता है। कुछ मामलों में आनुवांशिक, तो बाकी में खानपान ही इसकी वजह है। पिच्जा, पेटीज, पेस्ट्री, चाऊमीन ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जिन्हें चबाने के लिए जबड़े को ज्यादा कसरत नहीं करनी पड़ती। इससे विकास नहीं हो पाता। पहले चना, मटर, गन्ना,् भुट्टा आदि ठोस पदार्थ खाने से जबड़े मजबूत होते थे।

शोध के महत्वपूर्ण बिंदु

-134 मरीजों में सर्वाधिक 70 फीसद शहरी मिले

-90 फीसद मरीज मिडिल व लोअर मिडिल क्लास के थे

- 80 फीसदी मरीज में 15 से 35 साल के युवा 

- कुल मरीजों में 54 फीसदी पुरुष व 46 फीसद महिलाएं 

- 10 फीसद केसों में अक्ल दाढ़ मसूड़ों में छुपी मिली 

- 90 फीसदी केसों में अक्ल दाढ़ जबड़े की हड्डी में फंसी मिली

-20 प्रतिशत ऐसे युवा मरीज मिले जिनकी दोनों साइड की अक्ल दाढ़ जबड़े में फंसी मिली

दिवस का महत्व

13 फरवरी 1969 में ओरल एंड मैग्जीलोफेशियल सर्जरी एसोसिएशन की पहली बैठक भारत में हुई थी, तभी एसोसिएशन का गठन हुआ था। डॉ. मीनू सोराबजी जिन्वाला फाउंडर मेंबर व देश के पहले ओरल सर्जन थे।

जागरूकता जरूरी

एएमयू ओरल एंड मैग्जीलोफेशियल सर्जरी डिपार्टमेंट डेंटल कॉलेज के डॉ.गुलाम सरवर हाशमी का कहना है कि शोध का मकसद लोगों को जागरूक करना भी है। अक्ल दाढ़ की परेशानी होने पर मरीज अकसर डेंटिस्ट के पास पहुंच जाते हैं। डेंटिस्ट अक्ल दाड़ को नहीं निकाल सकते। लोगों को ये जानकारी नहीं होती। मैग्जीलोफेशियल सर्जन ही ऑपरेशन कर सकते हैं।

जबड़े का साइज हो जाता है छोटा

ओरल एंड मैग्जीलोफेशियल सर्जरी विभाग, बीएचयू के हेड डॉ.नरेश शर्मा का कहना है कि जबड़े के विकास पर आनुवांशिक असर तो पड़ता ही है, लेकिन अब फास्ट फूड भी एक कारण बन रहा है। फास्ट फूड खाने की तुलना में नार्मल फूड खाने से मसल्स मजबूत होती हैं। मसल्स मजबूत न होने की स्थिति में जबड़े का साइज छोटा हो जाता है। अब ऐसे मामले तेजी से सामने आ रहे हैैं।

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