अलीगढ़ (जेएनएन)। पाकिस्तान के जनक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में एक बार फिर राजनीति शुरू हो गई है। एएमयू में गांधीजी के साथ जिन्ना की तस्वीर मौलाना आजाद लाइब्रेरी में प्रदर्शनी में लगाने पर हंगामा मचने के बाद इंतजामिया ने लाइब्रेरियन को नोटिस देकर चुप्पी भले साथ ली हो, लेकिन कई सवा खुद खड़े हो गए हैं। खास बात यह है जिस प्रदर्शनी में बापू और जिन्ना की तस्वीर लगाई गईं थी, उसका उद़घाटन प्रो-वाइस चांसलर प्रो हनीफ बेग ने किया था और तस्वीर भी देखी थी। अहम बात यह है कि लाइब्रेरियन से जवाब मांग लिया गया है, लेेकिन प्राे वाइस चांसलर से पूछा तक नहीं गया है।

पहले इंतजामिया ने दिया था यह तर्क
जिन्ना की तस्वीर पर बवाल मचने के बाद गांधी जयंती पर लाइब्रेरी में लगी प्रदर्शनी में जिन्ना की तस्वीर दिखी तो फिर सवाल खड़े हो गए। इंतजामिया ने भी देरी नहीं की और राष्ट्रीय स्तर पर किरकिरी से बचने के लिए लाइब्रेरियन अमजद अली को नोटिस दे दिया। दो मई को यूनियन हॉल में लगी जिन्ना की तस्वीर हटाने को लेकर इंतजामिया ने तर्क दिया था कि यह मामला छात्रसंघ के अधिकार का है।

यहां तो बरसों से है जिन्ना की तस्वीर
एएमयू ने यूनियन हॉल ही नहीं, संग्रहालय में भी जिन्ना की कई तस्वीरें संग्रहित कर रखी हैैं। ये तस्वीरें बापू के साथ हैैं। एएमयू ने इन्हें ऐतिहासिक धरोहर मानते हुए दो अक्टूबर को शुरू हुई तीन दिवसीय प्रदर्शनी में लगाया था। बखेड़ा मचा तो भाजपा सांसद सतीश गौतम ने भी कुलपति प्रो. तारिक मंसूर से कार्रवाई के लिए कहा। बहरहाल, लाइब्रेरियन को शनिवार तक जवाब देना है।

संतोषजनक जवाब न होने पर होगी कार्रवार्इ
एएमयू जनसंपर्क विभाग के मेंबर इंचार्ज प्रो. साफे किदवई का कहना है कि प्रदर्शनी में गांधी जी की बहुत सी किताबें थीं। इसके अलावा बहुत से गांधी जी के फोटो भी थी। पीवीसी सरसरी निगाह से देखा होगा, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि उन्होंने किसी खास फोटो को बढ़ावा दिया है। म्यूजियम में रखी जिन्ना की तस्वीरों का कहीं प्रदर्शन नहीं किया जाता है। प्रदर्शनी में सिर्फ तीन दिन के लिए किया गया था। जैसे ही पता लगा उन्हें हटा दिया गया। चूक के लिए लाइब्रेरियन को नोटिस भी दिया गया है। जवाब संतोषजनक न होने पर कार्रवाई भी की जाएगी।

देश के बंटवारे का खलनायक था जिन्ना
समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के मंडल प्रभारी डॉ. रक्षपाल सिंह ने गांधीजी संग जिन्ना की तस्वीर पर विवाद को अनुचित व गैर जिम्मेदाराना बताया है। कहा, देश बंटवारा एक त्रासदी थी। इसका खलनायक जिन्ना था। उसने कई भारतीयों के साथ बैठकें कीं। इसकी तस्वीरें संग्रहालयों में सुरक्षित हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि उन्हें महिमामंडित किया जा रहा है।

तस्वीरों से नहीं मिलेगा चुनावी लाभ
डॉ. रक्षपाल सिंह ने दलील दी है कि जैसे भगवान राम व भगवान कृष्ण की चर्चा होती है तो रावण व कंस की भी होती है। ऐसे ही गांधी, नेहरू, सरदार पटेल, अबुल कलाम आजाद, वीर अब्दुल हमीद जैसे देशभक्तों के साथ देशद्रोही जिन्ना की भी चर्चा होगी। उन्होंने जिन्ना पर हायतौबा मचाने वाले भाजपाइयों को सकारात्मक कार्यों में अपनी ऊर्जा लगाने की सलाह दी।

इतिहास से नहीं हट सकते काले पन्ने
एएमयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी ने कहा कि जिन्ना की तस्वीर को लेकर नया मुद्दा बनाना गलत है। आजादी की लड़ाई में कई लोगों का योगदान है। इतिहास में सफेद-काले पन्ने हैैं। इनमें से काले पन्नों को हटा नहीं सकते है।