अलीगढ़ [जेएनएन]। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में हुए बवाल के एक माह बाद पुलिस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की याद आई है। बुधवार को एसएसपी को दी गई तहरीर में यूनिवर्सिटी ने कहा कि पुलिस को स्थिति सामान्य करने व मुख्य मार्ग को खोलने की अनुमति दी थी। छात्रावास में प्रवेश के लिए नहीं कहा था। विवि प्रशासन के संज्ञान में लाए गए सबूत बताते हैं कि पुलिस कर्मियों ने मॉरिसन कोर्ट हास्टल परिसर में प्रवेश करके सीमाएं लांघी। उधर, पुलिस ने यह कहते हुए एफआइआर दर्ज करने से इनकार कर दिया है कि मामला हाईकोर्ट में लंबित है। पुलिस ने तहरीर वापस भी कर दी।

यह है मामला

दिल्ली के जामिया मिल्लिया में हुए बवाल के बाद एएमयू में 15 दिसंबर को उपद्रव हुआ था। छात्र बाबे सैयद को तोड़कर कैंपस से बाहर आ गए थे। जहां पुलिस से उनकी भिड़ंत हुई। हालात को काबू में करने के लिए इंतजामिया ने कैंपस में पुलिस बुलाई थी। यहां पुलिस ने छात्रों पर लाठी चार्ज किया। इसमें कई छात्र घायल हुए। एक छात्र का तो एक हाथ ही कट गया। कैंपस में पुलिस को बुलाने का छात्र पहले दिन से ही विरोध कर रहे हैं। कुलपति व रजिस्ट्रार से इस्तीफे की मांग की जा रही है। कैंपस में जब भी छात्र मार्च निकालते हैं तो कुलपति व रजिस्ट्रार के खिलाफ जरूर नारेबाजी होती है। इस विरोध के बीच इंतजामिया ने अब पुलिस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का निर्णय लिया। एएमयू प्रवक्ता प्रो. शाफे किदवई ने बताया कि ऑफताब हॉल के मॉरिसन कोर्ट हास्टल में पुलिस की कार्रवाई के विरोध में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए एसएसपी को तहरीर दी है। पुलिस ने हाईकोर्ट में केस लंबित होने के चलते रिपोर्ट दर्ज करने से इनकार कर दिया है।

हालात के अनुसार पुलिस ने की कार्रवाई

एसएसपी आकाश कुलहरि ने कहा है कि कैंपस में पुलिस को बुलाने के लिए रजिस्ट्रार ने लिखकर दिया था। इसके बाद ही पुलिस ने प्रवेश किया। उस पत्र में ऐसा कुछ नहीं लिखा कि पुलिस कहां-कहां जाएगी और कहां नहीं? हालात के अनुसार पुलिस कार्रवाई करती है।

Posted By: Sandeep Saxena

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