विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

किसान के बेटे ने किया कमाल, अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छूकर रचा इतिहास

Published: Sun, 29 Mar 2026 08:36 PM (IST)

सचिन शर्मा ने गुजरात के पहले साउंडिंग रॉकेट के सफल प्रक्षेपण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सचिन अब भारत के पहले ...और पढ़ें

गुजरात के धोलेरा में राकेट लांच के दौरान बीच में सफेद शर्ट में सचिन शर्मा। सौ. स्वयं

गुजरात के धोलेरा में राकेट लांच के दौरान बीच में सफेद शर्ट में सचिन शर्मा। सौ. स्वयं

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

विवेक शर्मा, अलीगढ़। गभाना के एक छोटे से गांव की मेधा ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपनी चमक बिखेरते हुए जनपद का नाम रोशन किया है। नगला राजू निवासी एक किसान के बेटे ने अपनी तकनीकी कुशलता का लोहा मनवाते हुए गुजरात के पहले 'साउंडिंग रॉकेट' के सफल प्रक्षेपण में निर्णायक भूमिका निभाई है। 15 मार्च को जब यह रॉकेट धोलेरा के आसमान को चीरते हुए खंभात की खाड़ी के ऊपर पहुंचा, तो भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया।

तीन साल की तपस्या और स्वदेशी तकनीक

नगला राजू निवासी किसान भोलाशंकर शर्मा के ज्येष्ठ पुत्र सचिन शर्मा अपने सहयोगी योगेश शर्मा के साथ अहमदाबाद के सानंद में कृष्णा इंजीनियरिंग नाम से संस्थान संचालित करते हैं। सचिन ने ओमस्पेस के सीईओ डॉ. रविंद्र राज के विजन को धरातल पर उतारने के लिए सिंगल-स्टेज सब-आर्बिटल साउंडिंग रॉकेट के निर्माण का बीड़ा उठाया।

टीम के साथ मिलकर रॉकेट के इंजीनियरिंग फैब्रिकेशन, मॉडल मेकिंग और टेक्निकल असेंबली की जिम्मेदारी संभाली। करीब तीन साल के कड़े परिश्रम और अत्याधुनिक कार्बन फाइबर एयरफ्रेम के उपयोग से इस स्वदेशी रॉकेट को तैयार किया गया।

धोलेरा के तट पर गूंजा भारत का शंखनाद

सुरक्षा एवं लाजिस्टिक के लिए भारतीय तटरक्षक बल और विमानपत्तन प्राधिकरण से अनुमति के बाद 15 मार्च को धोलेरा के बावलियारी गांव से इसे लान्च किया गया।

गुजरात के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया की उपस्थिति में रॉकेट ने सफलतापूर्वक तीन किलोमीटर की लक्षित ऊंचाई प्राप्त की। सचिन के मुताबिक यह रॉकेट हल्का होने के साथ अत्यंत सुदृढ़ है, जो आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को पुष्ट करता है।

इनफिनिटी वन पर कार्य कर रही टीम

सचिन की उड़ान यहीं थमने वाली नहीं है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम अब भारत के पहले रीयूजेबल (पुन: प्रयोज्य) सैटेलाइट लांचर इनफिनिटी वन पर कार्य कर रही है। यह तकनीक भविष्य में अंतरिक्ष के कचरे को कम करने में सहायक होगी और उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने की लागत में भारी कमी लाएगी। सचिन की इस अभूतपूर्व उपलब्धि से क्षेत्र में हर्ष की लहर है और लोग इसे ग्रामीण प्रतिभा के वैश्विक उदय के रूप में देख रहे हैं।

पारिवारिक पृष्ठभूमि व शिक्षा

सचिन के पिता भोलाशंकर शर्मा किसान हैं, जबकि माता सुनीता देवी गृहणी हैं। सचिन ने अपनी प्रारंभिक और इंटरमीडिएट की शिक्षा गभाना से ही ग्रहण की, जिसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वह गुजरात चले गए। वह चार भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। उनके छोटे भाई रवि शर्मा वर्तमान में अहमदाबाद की ही एक निजी कंपनी में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं।