अलीगढ़, जागरण संवाददाता। जिला जज डा. बब्बू सारंग, डीएम इंद्र विक्रम सिंह व एसएसपी कलानिधि नैथानी ने मंगलवार को जिला कारागार का निरीक्षण किया। इस दौरान साफ-सफाई, टेलीफोन, सीसीटीवी कैमरे, पेयजल, शौचालय, खानपान व्यवस्था, स्वास्थ्य, सुरक्षा व्यवस्था, बैरक का रखरखाव का हाल देखा। हालांकि सभी सुविधाएं ठीक मिलीं। अफसरों ने कैदियों से भी बातचीत करके फीडबैक लिया। इस पर कैदियों ने बताया कि वे टेलीफोन  से बात कर रहे हैं। निर्धारित समय पर खाना उपलब्ध कराया जाता है।

कानूनी सहायता का दिया आश्‍वासन

निरीक्षण के दौरान डीएम ने चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ से चिकित्सालय में भर्ती कैदियों के बारे में जानकारी ली। पूछा कि कैदियों को कोई ऐसी बीमारी तो नहीं है, जिसका इलाज यहां न हो पा रहा हो। उन्होंने मरीजों से भी वार्ता की। मरीजों ने उन्हें समुचित इलाज की बात कही। जिला जज डा. बब्बू सारंग ने कहा कि जेल में कुछ कैदी ऐसे भी हैं, जिन्हें विधिक सहायता की आवश्यकता है। डीएम-एसएसपी ने आश्वस्त किया कि उन्हें निश्शुल्क कानूनी सहायता दिलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ कैदी ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपना जुर्म स्वयं कबूलकर कानून की मदद की है और कुछ अच्छे व्यवहार वाले कैदी भी हैं। ऐसे कैदियों को न्यायिक तौर-तरीके से जो भी मदद संभव है, वह दिलाई जाएगी। डीएम ने बताया कि आजाद फाउंडेशन कारागार में स्वरोजगार स्थापना की दिशा में कार्य कर रही है। संस्था द्वारा महिला बंदियों को हैंडीक्राफ्ट, कढ़ाई-बुनाई के साथ अन्य रोजगारपरक कार्य सिखाए जा रहे हैं। इस दौरान प्रभारी वरिष्ठ जेल अधीक्षक व जेलर पीके सिंह, जेल चिकित्सा अधिकारी डा. सैय्यद शाहरुख रिजवी, डा. अभिषेक गुप्ता, डिप्टी जेलर सुरेश कुमार, पीके मिश्र, राजेश कुमार राय, आफताब अहमद अंसारी, फार्मासिस्ट दिनेश कुमार वर्मा व आनंद पांडे भी मौजूद रहे।

अधिकारियों ने की प्रशंसा

आजाद फाउंडेशन द्वारा महिला बंदियों द्वारा बनाई गई आर्टीफिशियल ज्वेलरी व हैंडीक्राफ्ट आइटम की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसकी अधिकारियों ने ने प्रशंसा की। फाउंडेशन की सचिव शाजिया सिद्दीकी भी मौजूद थीं। फाउंडेशन ने अधिकारियों को स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। अधिकारियों ने प्रशिक्षण प्राप्त महिला बंदियों को प्रमाण पत्र दिए। निरीक्षण के बाद डीएम-एसएसपी ने जेल की तरफ से विचाराधीन बंदी कुलदीप बघेल द्वारा क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम पर बनाई गई पेंटिंग जिला जज को भेंट की।

Edited By: Sandeep Kumar Saxena