अलीगढ़ [जेएनएन]। स्वास्थ्य विभाग का नौ करोड़ का टेंडर घोटाला बुधवार को लखनऊ में कोल विधायक अनिल पाराशर ने जोर-शोर से उठाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर में होने के कारण भले ही मुलाकात नहीं हो पाई, मगर स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह, प्रमुख सचिव संजय प्रसाद व ओएसडी अभिषेक कौशिक से मिलकर घोटाले से धूमिल हो रही सरकार की छवि को बचाने की अपील की। कहा, उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री ने कार्रवाई का भरोसा दिया।

शासन से मिला था नौ करोड़ का बजट

पत्र में विधायक ने कहा कि दीनदयाल अस्पताल व अतरौली के 100 शैय्या अस्पताल को उच्चीकृत करने के लिए शासन से नौ करोड़ का बजट मिला। 21 फरवरी 2019 को दोनों अस्पतालों के लिए टेंडर निकालते समय ऐसी शर्त रखी गई कि चहेती फर्म को ही टेंडर दिया जा सके। सामान की आपूर्ति एक ही दिन में करनी होगी। जनप्रतिनिधि की शिकायत व पत्र को तभी संज्ञान में लिया जाएगा, जब टेंडर प्रपत्र मूल्य 11800 रुपये के साथ एक लाख रुपये का अतिरिक्त नॉन रिफंडेबल राष्ट्रीयकृत बैंक का एफडीआर या डिमांड ड्राफ्ट हो। यह भी जोड़ा गया कि एक निविदा आने पर भी विचार किया जाएगा।

सरकार को बदनाम करने की कोशिश

विधायक ने कहा कि टेंडर में घोर भ्रष्टाचार की दुर्गंध के साथ सरकार को बदनाम करने की पूरी कोशिश की गई है। दैनिक जागरण का हवाला देकर बताया कि स्वास्थ्य विभाग में नियम विरुद्ध कार्य  और उनमें लिप्त अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई न होने से संबंधित खबरें नियमित रूप से छप रही हैं। कार्रवाई न होने से सरकार की छवि धूमिल हो रही है।

अस्पतालों में बाहर की दवाएं

विधायक ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा उपलब्ध होने के बावजूद बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं। 13 जुलाई 2018 को विभागीय अनियमितताओं की जानकारी मांगी थी, जिसका जवाब नहीं दिया गया।

अचानक मुख्यमंत्री चले गए लखनऊ से बाहर

विधायक अनिल पाराशर का कहना है कि मुख्यमंत्री के अचानक लखनऊ से बाहर जाने के कारण भेंट नहीं हो पाई। स्वास्थ्य मंत्री, प्रमुख सचिव व मुख्यमंत्री के ओएसडी से मिलकर विभागीय भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए कार्रवाई की मांग की। दोषी अब बच नहीं पाएंगे।

Posted By: Sandeep Saxena

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