अलीगढ़ के कटरा गांव में मौत के बाद भी नसीब नहीं होती दो गज जमीन, नहर किनारे होता अंतिम संस्कार
अलीगढ़ के गभाना क्षेत्र के कटरा गांव में श्मशान घाट न होने से ग्रामीणों को अपनों के अंतिम संस्कार के लिए नहर किनारे का सहारा लेना पड़ता है।

कटरा में नहर किनारे पटरी पर बुजुर्ग का अंतिम संस्कार करते ग्रामीण
HighLights
कटरा गांव में श्मशान घाट का अभाव।
अंतिम संस्कार के लिए नहर किनारे मजबूरी।
एसडीएम ने भूमि आरक्षित करने का दिया आश्वासन।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। गभाना क्षेत्र के गांव कटरा में जिंदगी भर अपने गांव और समाज का हिस्सा रहे ग्रामीणों को मृत्यु के बाद भी सम्मानजनक अंतिम विदाई के लिए जगह नसीब नहीं हो रही है।
गांव में श्मशान घाट नहीं होने के कारण ग्रामीणों को अपनों के अंतिम संस्कार के लिए नहर किनारे का सहारा लेना पड़ता है। गांव में किसी की मौत होने पर स्वजन पहले से ही इस चिंता में घिर जाते हैं कि आखिर अंतिम संस्कार कहां किया जाएगा। शनिवार को गांव के एक बुजुर्ग की मृत्यु के बाद फिर यही पीड़ा सामने आई।
गांव कटरा ग्राम पंचायत मढ़ौला का माजरा है। गांव में आबादी बढ़ने के बावजूद आज तक श्मशान घाट के लिए जमीन आरक्षित नहीं हो सकी है। कई बार अधिकारियों से मांग करने के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने बताया कि अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील जरूरत के लिए भी उन्हें भटकना पड़ता है। जीवन में हर व्यक्ति को अपने घर और गांव का सहारा मिलता है, लेकिन मृत्यु के बाद भी दो गज जमीन के लिए संघर्ष करना पड़े, इससे बड़ी विडंबना क्या होगी।
श्मशान घाट के अभाव में ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए नहर किनारे जगह तलाशनी पड़ती है। बरसात के दिनों में यह परेशानी और बढ़ जाती है।
शनिवार को भी गांव के बुर्जुग चंद्रभान सिंह की बीमारी से मृत्यु हो जाने के बाद भी स्वजन व ग्रामीणों को यही समस्या का सामना करना पड़ा। उन्हें मजबूरन गांव के पास से गुजर रही मध्य गंग नहर किनारे पटरी पर ही अंतिम संस्कार करना पड़ा। ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में जल्द श्मशान घाट के लिए भूमि आरक्षित कराने की मांग की है।
एसडीएम हरिश्चंद्र ने बताया कि हल्का लेखपाल को मौके पर भेजकर श्मशान घाट के लिए भूमि चिह्नित कराकर आरक्षित कराने की कार्रवाई की जाएगी।
