अलीगढ़, सुमित शर्मा। हाथ कभी अपराध के कीचड़ में सन गए थे, उन्होंने अब सुनहरे भविष्य लिखने की कलम थाम ली है। गुस्से वाली आंखों में भी अब खूबसूरत जीवन के छोटे-बड़े सपने हैं। ये कहानी जिला कारागार के उन बंदियों की है, जो बाहर की दुनिया की सैकड़ों बातें सुनकर अंधेरे में आ गए। लेकिन, खुद को टूटने नहीं दिया। साढ़े सात सौ से अधिक बंदी इन दिनों पढ़ाई में दिलचस्पी दिखाकर नई राह बनाने की ओर निकल पड़े हैं। दिसंबर में उनकी परीक्षाएं हैं तो सबकुछ भुलाकर बस तैयारी में जुटे हैं।

शिक्षक करते हैं पढ़ाई में सहायता

जिला कारागार में वर्तमान में करीब चार हजार बंदी व कैदी हैं। जेल प्रशासन की ओर से रोजाना बंदियों की काउंसिलिंग की जाती है, ताकि वे खुश रहें और अपने भविष्य के बारे में सोचें। इसी के चलते चाहें प्रदेश स्तर पर खेलों की बाजी हो या फिर संकट की घड़ी में मदद करने की बात आए, यहां के बंदी आगे ही रहते हैं। इसी के साथ साक्षर बनने की लाइन में भी बंदियों ने खूब धाक जमाई है। इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) से अलग-अलग 15 कोर्स करने के लिए वर्ष 2021 जून में कुल 787 बंदियों ने आवेदन किया है। बंदियों के पढ़ने के लिए एक हाल बना हुआ है। इसमें रोजाना तीन से चार घंटे पढ़ाई करवाई जाती है। करीब 25 शिक्षक ऐसे हैं, जो बंदियों की पढ़ाई में मदद करते हैं। कोर्स के हिसाब से बंदियों को किताबें उपलब्ध कराई गई हैं। चूंकि दिसंबर में परीक्षाएं होनी हैं तो बंदी पूरी मेहनत के साथ सफलता पाने में लग गए हैं। डिप्टी जेलर राजेश राय की देखरेख में बंदी पढ़ाई करते हैं।

इग्नू से आते हैं प्रश्नपत्र

डिप्टी जेलर राजेश राय ने बताया कि दिसंबर में परीक्षा की अभी तारीखें नहीं आई हैं। तारीखें आते ही इग्नू की तरफ से ही प्रश्नपत्र भेजे जाएंगे। उनको तय दिन पर ही बंदियों के बीच बांट दिया जाएगा। इग्नू से परीक्षक भी निगरानी के लिए आएंगे। परीक्षा पूरी होने के बाद कापियों को डाक के जरिये भेज दिया जाएगा।

खान-पान की पढ़ाई में अधिक दिलचस्पी

कुल 787 बंदियों में से 605 ने खान-पान की पढ़ाई में दिलचस्पी दिखाई है। कोर्स का नाम सर्टीफिकेट आफ फूड्स एंड न्यूट्रीशन है। छह माह के इस कोर्स में बंदियों को खाद्य व पोषाहार की बारीकियां बताई जा रही हैं। ये भी सिखाया जा रहा है कि सेहत के लिए कौन सी चीज लाभधायक है और कौन सी नुकसानदायक। कोर्स पूरा होने के बाद बंदियों को इसका सर्टीफिकेट भी दिया जाएगा।

कोर्स का नाम, बंदियों की संख्या, अवधि

बैचलर आफ आर्ट जनरल, 66, तीन साल

वैचलर आफ आर्ट, 8, तीन साल

बैचलर आफ कामर्स, 10, तीन साल

मास्टर्स इन हिंदी, 2, दो साल

मास्टर्स इन हिस्ट्री, 2, दो साल

सर्टीफिकेट आफ टूरिज्म स्टडीज, 3, छह माह

सर्टीफिकेट आफ एड एंड फैमिली एजुकेशन, 3, छह माह

सर्टीफिकेट आफ ह्यूमन राइट्स, 26, छह माह

डिप्लोमा इन न्यूट्रीशन एंड हेल्थ एजुकेशन, 4, एक साल

सर्टीफिकेट आफ उर्दू लैंग्वेज, 24, छह माह

सर्टीफिकेट आफ इंटरनेशल गाइडेंस, 17, छह माह

सर्टीफिकेट आफ डिसास्टर मैनेजमेंट, 10, छह माह

सर्टीफिकेट आफ न्यूट्रीशन एंड चाइल्ड केयर, 4, छह माह

सर्टीफिकेट आफ कंज्यूमर प्रोटेक्शन, 3, छह माह

सर्टीफिकेट आफ फूड एंड न्यूट्रीशन, 605, छह माह

जेल एक सुधार गृह है। यहां बंदियों को रचनात्मक व रोजगारपरक कार्यों से जोड़ा जाता है, ताकि भविष्य में वह आत्मनिर्भर बन सकें। इसी क्रम में कई बंदी शिक्षा में भी रुचि रख रहे हैं। इस साल 787 बंदियों ने अलग-अलग कोर्सों के लिए आवेदन किया है। उनके लिए किताबें उपलब्ध करा दी गई हैं। फिलहाल बंदी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।

विपिन कुमार मिश्रा, वरिष्ठ जेल अधीक्षक