फर्जी पासपोर्ट से दाखिल हुआ म्यांमार का नागरिक, अलीगढ़ कोर्ट ने जमानत की खारिज
म्यांमार के नागरिक रिजवान उर्फ रफीक उर्फ रिदवान की जमानत अर्जी अलीगढ़ कोर्ट ने खारिज कर दी है। उस पर ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवाकर विदेश यात्रा करने के आरोपित म्यांमार निवासी रिजवान उर्फ रफीक उर्फ रिदवान की जमानत अर्जी अदालत ने रद कर दी। अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) कोर्ट संख्या-02 के न्यायाधीश हरेन्द्र कुमार ओझा ने 12 अक्टूबर को यह आदेश दिया।
रोरावर थाने में आरोपित के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत है। अभियोजन के अनुसार, 21 अगस्त 2026 को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर मथुरा बाइपास की ओर नादा चौराहे के पास आरोपित को रोका था। तलाशी में दो मोबाइल फोन, आधार कार्ड, बैंक आफ बड़ौदा की पासबुक और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) कार्ड की छायाप्रति मिली। मोबाइल की गैलरी में भारतीय पासपोर्ट भी मिला।
जांच में पता चला कि आरोपित मूल रूप से म्यांमार का निवासी है और वर्ष 2013 में बांग्लादेश के रास्ते अलीगढ़ आया था। उसने कथित तौर पर आधार कार्ड, पैन कार्ड और भारतीय पासपोर्ट बनवाया। इसी पासपोर्ट के आधार पर दुबई और सऊदी अरब में नौकरी करने की बात भी सामने आई है। बचाव पक्ष ने आरोपित को निर्दोष बताते हुए गिरफ्तारी और तलाशी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
वहीं, अभियोजन ने बिना पासपोर्ट और वीजा भारत में रहने तथा फर्जी दस्तावेज बनवाने के आरोपों को गंभीर बताया। अदालत ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए जमानत प्रार्थनापत्र निरस्त कर दिया। मामले में विशेष लोक अभियोजक लव कुमार बंसल और संजय शर्मा ने पैरवी की।
