अलीगढ़, जागरण संवाददाता।  कोरोना काल में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मधु पुंढीर जब घर-घर जाकर मरीजों की स्क्रीनिंग करने जाया करती थीं। तब लाेग उन्हें देखकर दरवाजे बंद कर लिया करते थे। गली में लोग उनके पास तक आने से डरते थे। इसके बावजूद वह अपने फर्ज से डिगी नहीं। मरीजों की कोविड की जांच कराने और अस्पताल पहुंचाने के लिए वह निरंतर जुटी रहीं। ये कहानी अकेली मधु पुंढीर की नहीं है। उन सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व आशा कार्यकर्ता की है जिन्होंने कोरोना काल में अपनी जान की बाजी लगाकर ड्यूटी की। अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटीं। दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की तो ड्यूटी के दौरान कोरोना से जान भी चली गई।

चिंता किए बिना घर-घर

कोरोना काल शायद ही कोई भूल पाए। ऐसा समय था जब अपने भी दूरी बना लेते थे। तब कोरोना योद्धाओं ने अहम भूमिका निभाई। इनमें आंगनबाड़ी व अाशा कार्यकर्ता उन्हीं योद्धाओं में शामिल हैं। कोरोना खात्में मेें इनकी भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता। अस्पतालों में भले ही इनकी ड्यूटी न लगी हो, लेकिन यह खुद की जाकर संदिग्ध मरीजों की तलाश करती थीं। मरीज में लक्षण मिलने पर जांच कराने तक की जिम्मेदारी इन्हीं की होती थी। कोरोना किट वितरण व्यवस्था भी इन्हीं के हाथों में थी। कोरोन काल में एक साथ पूरे जिले में आपाधापी मची हुई थी। अस्पतालों में स्टाफ की कमी थी। चिकित्सक तक पूरे नहीं थे। दूसरे शहरों व प्रदेशों से आने वाले लोगों की भी जांच करनी थी। इसके चलते प्रदेश सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशाओं को यह जिम्मेदारी दी थी। जिले में करीब ढाई हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशाओं को लगाया गया था।

कोरोना के समय में करीब दो महीने तक घर-घर जाकर सर्वे किया था। संदिग्ध मरीजों को कोरोना किट वितरित की। अच्छी बात यह है कि अब मेहनत से सब ठीक है। काेरोना काल में सभी ने अच्छा कार्य किया।

रजनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

कोरोना के डर से लोग घर से नहीं निकलते थे। ऐसे समय में हम मरीजों की जांच कर रहे थे। घर वाले भी इसके पक्ष में नहीं थे, लेकिन हमने फर्ज के लिए पूरी मेहनत से काम किया।

-उर्मिला देवी, आशा कार्यकर्ता

कोरोना के समय में जब सभी लोग भयभीत थे, उस समय हमको जिम्मेदारी घर-घर सर्वे करने की जिम्मेदारी मिली थी। लोग हमको देखकर अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते थे। उस दौर को कभी भूल नहीं पाऊंगी।

मधु पुंढीर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

जब लोग कई-कई दिनों तक घरों में रहते थे, ऐसे समय में हम सभी थर्मल स्केनर से दूसरे शहर व प्रदेशों से आने वाले लोगों की जांच कर रहे थे। हर दिन गांव-गांव जाना पड़ता था। कई साथी कोरोना की चपेट में आए तो डर भी लगा, लेकिन पीछे नहीं हटे।

मंजू देवी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता