अलीगढ़: पांच साल में 10 करोड़ से ज्यादा की 13 नई शत्रु संपत्तियां घोषित, बंटवारे के समय चले गए पाकिस्तान; फिर नहीं लौटे
अलीगढ़ में पिछले पांच वर्षों में 10 करोड़ रुपये से अधिक की 13 नई संपत्तियों को शत्रु संपत्ति घोषित किया ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। जिले में शत्रु संपत्तियों को लेकर प्रशासन की कार्रवाई अब धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है। वर्षों से कब्जे व निजी इस्तेमाल में चली आ रही संपत्तियों की पड़ताल के बाद पिछले पांच वर्षों में 10 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की 13 नई संपत्तियां शत्रु संपत्ति घोषित की गई हैं। इसके साथ ही जिले में शत्रु संपत्तियों की संख्या 48 से बढ़कर 61 हो गई है।
इनमें कोल तहसील में सबसे अधिक पांच संपत्तियां शामिल हैं। शत्रु संपत्तियों में आवासीय भवन, दुकान, खाली प्लाट, कृषि भूमि, बाग व अन्य प्रकार की जमीन शामिल हैं। इनमें कई संपत्तियां शहर और प्रमुख इलाकों में स्थित हैं। इनकी कीमत करोड़ों रुपये बताई जाती है। वर्षों से इनका निजी उपयोग होने के कारण प्रशासन को राजस्व का भी नुकसान हो रहा था। प्रशासन के पास पिछले वर्षों में कई शिकायतें पहुंची।
इसमें आरोप लगाया गया कि आजादी के बाद पाकिस्तान जा चुके लोगों की संपत्तियों पर लोगों ने अवैध कब्जे कर रखे हैं। इसमें पिलखना, जलाली, हरदुआगंज व अतरौली की संपत्तियां शामिल थीं। प्रशासन ने इनकी जांच की। इसमें शत्रु संपत्ति के रूप में पुष्टि हुई।
इसके बाद शासन स्तर से इन्हें शत्रु संपत्तियां घोषित किया गया। अब नई संपत्तियां घोषित होने के बाद इनके अभिलेख और कब्जे की स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती प्रशासन के सामने है।
61 संपत्तियों में सबसे अधिक कोल में
जिले में दर्ज 61 शत्रु संपत्तियों में सबसे अधिक करीब तीन दर्जन कोल तहसील क्षेत्र में हैं। शहर में ही करीब डेढ़ दर्जन संपत्तियां मौजूद हैं। इसके अलावा अतरौली, खैर और गभाना तहसील क्षेत्रों में भी शत्रु संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें कृषि भूमि से लेकर दुकान, मकान और खाली भूखंड तक शामिल हैं।
दशकों से कब्जे, कहीं खेती तो कहीं कारोबार
देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान चले गए लोगों की संपत्तियों को शत्रु संपत्ति की श्रेणी में रखा गया था। इन संपत्तियों की अभिरक्षा सरकार के पास होती है। हालांकि जिले में कई ऐसी संपत्तियां हैं, जिन पर दशकों से लोग कब्जा किए हुए हैं।
कहीं इन जमीनों पर खेती हो रही है तो कहीं व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कुछ मामलों में सहखातेदारों के कब्जे की स्थिति भी सामने आई है। लंबे समय से कब्जे में रहने के कारण इन संपत्तियों के नियमित सत्यापन और संरक्षण को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
गृह मंत्रालय के अभिरक्षक कार्यालय की अहम भूमिका
शत्रु संपत्तियों से जुड़े मामलों में केंद्रीय गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। संपत्तियों के सर्वे और सत्यापन को लेकर समय-समय पर इस कार्यालय की ओर से निर्देश जारी किए जाते हैं। स्थानीय स्तर पर इनके संरक्षण और अभिलेखों के रखरखाव की जिम्मेदारी प्रशासन की होती है। जिले में डीएम पदेन उप अभिरक्षक शत्रु संपत्ति हैं।
इन क्षेत्रों में दर्ज हैं संपत्तियां
कोल तहसील के बदरबाग, हरदुआगंज, दोदपुर, बेगपुर कंजोला, वीरपुर छबीलगढ़ी, विसावनपुर सिल्ला, ढैकुरा, मदारगेट, कोठी धर्मपुर हाउस, कोठी कोहना, अनौना हाउस, पिलखना, मिर्जापुर सिया, तकीपुर, घुड़ियाबाग और सराय बैरागी में शत्रु संपत्तियां दर्ज हैं। वहीं गभाना के सुदेशपुर व जामनका, खैर के राजपुर और अतरौली के औरेनी दलपतपुर में भी ऐसी संपत्तियां हैं।
शुरू की सख्ती
कोल तहसील प्रशासन ने शत्रु संपत्तियों के खिलाफ सख्ती कर दी है। डीएम अविनाश कुमार के निर्देश में एसडीएम डा. गजेंद्र पाल सिंह ने एक टीम गठित की है। यह टीम विभिन्न क्षेत्रों में शत्रु संपत्तियों पर अवैध कब्जे की शिकायत पर कार्रवाई कर रही है। एसडीएम कोल ने बताया कि शत्रु संपत्तियों के अभिलेखों का सत्यापन व संरक्षण की कार्रवाई नियमानुसार आगे बढ़ाई जा रही है।
