आगरा और अलीगढ़ के BSA को हाईकोर्ट का समन, स्कूल अलॉटमेंट और सेलरी से जुड़ा है मामला
अलीगढ़ में एक शिक्षक के त्यागपत्र निरस्तीकरण, विद्यालय आवंटन और वेतन भुगतान का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। अलीगढ़ में तैनात शिक्षक के त्यागपत्र को निरस्त किए जाने के बाद विद्यालय आवंटन और वेतन भुगतान से जुड़ा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले में कोर्ट ने अलीगढ़ के पूर्व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डाक्टर राकेश कुमार को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा है।
वर्तमान बीएसए आलोक सिंह के व्यक्तिगत शपथपत्र और बिना शर्त माफी के बाद कोर्ट ने उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी है। डाक्टर राकेश कुमार वर्तमान में आगरा बीएसए हैं।
बैंक में कार्यरत अखिलेश कुमार की करीब दो साल पूर्व बेसिक शिक्षा विभाग में बतौर सहायक अध्यापक पर नियुक्ति हुई। विभागीय औपचारिकताएं पूर्ण न होने पर उन्हें अस्थाई रूप से स्कूल आवंटित किया गया।
कुछ समय बाद अखिलेश कुमार ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया, मगर कुछ समय में ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय व सचिवालय में प्रत्यावेदन देकर त्यागपत्र निरस्त करने की मांग की, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
आरोप है कि त्यागपत्र निरस्त होने के बावजूद उन्हें विद्यालय आवंटन और वेतन का भुगतान नहीं मिला है, जिसके विरुद्ध वह हाईकोर्ट पहुंच गए।
न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की अदालत ने तीन सितंबर को पारित आदेश में कहा कि पूर्व बीएसए राकेश कुमार, जो वर्तमान में आगरा में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के पद पर तैनात हैं, कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर अपने आचरण की व्याख्या करें। इसके लिए उन्हें व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। कोर्ट के समक्ष दाखिल वर्तमान बीएसए आलोक सिंह के व्यक्तिगत शपथपत्र के अनुसार उन्होंने दो जून 2026 को अलीगढ़ बीएसए का पद संभाला था। उनके कार्यभार ग्रहण करने के बाद याची अखिलेश कुमार के त्यागपत्र को उनके पूर्ववर्ती अधिकारी ने निरस्त कर दिया था।
इसके बाद याची ने सात जुलाई को विद्यालय आवंटन और वेतन भुगतान के लिए आवेदन किया। याची के आवेदन को आवश्यक निर्देश के लिए सचिव, बेसिक शिक्षा बोर्ड, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज को भेज दिया गया है।
वर्तमान बीएसए ने कोर्ट को हुई असुविधा के लिए बिना शर्त माफी भी मांगी। इस पर अदालत ने आलोक सिंह की व्यक्तिगत उपस्थिति से उन्हें मुक्त कर दिया।
