सुरजीत पुंढीर, अलीगढ़ । कोरोना से जंग में एक बार फिर महिलाएं मेहनत से सुनहरी इबारत लिखेंगी। प्रशासन ने इसकी तैयारी शुरू हो गई है। जिले में 120 महिलाओं को जल्द ही कोरोना के बचाव में कारगार मास्क बनाने की जिम्मेदारी मिलने जा रही है। हर दिन यह महिलाएं करीब चार हजार मास्क तैयार करेंगी। विभागों के माध्यम से इनक वितरण होगा। 120 महिला समूहों को इस कार्य से जोड़ा जा रहा है। मास्क के लिए प्रशासन कपड़े का इंतजाम करने की भी तैयारी कर रहा है। 

25 समूहों की 64 महिलाएं जुटी थी 

पिछले साल जिले में मार्च में महिला समूहों ने कपड़े के मास्क बनाने की शुुरुआत की थी। जिसे में करीब 25 समूहों की 64 महिलाओं ने मास्क बनाए थे। हर दिन करीब तीन हजार से अधिक मास्क तैयार होते थे। एक महिला 50-60 मास्क तक बनाती है।अलीगढ़ प्रशासन महिलाओं को मुफ्त में कपड़ा देता था। मास्क के लिए चार रुपये प्रति मास्क से पारिश्रमिक भुगतान होता थाये मास्क स्वास्थ्य विभाग और अन्य सरकारी विभागों में सप्लाई किए गए थे। इसमें एक महिला को करीब 200-250 रुपये प्रतिदिन की मजदूूरी मिल जाती थी। इस दौरान अलीगढ़ की महिलाओं ने बेहतर काम दिया था। सूबे भर में मास्क बनाने में टाप पांच में रही थी। अब दोबारा से कोरोना का प्रकोप बढ़ने लगा है। हर दिनों सैकड़ों मरीज मिल रहे हैं। इसके चलले एक बार फिर प्रशासन ने इन महिलाओं को मास्क बनाने की जिम्मेदारी देने की तैयारी कर ली है। 

120 महिलाएं लगेंगी 

इस बार राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अफसरों ने मास्क बनाने का दायरा बढ़ा दिया है। पिछले बार जहां तीन हजार प्रतिदिन बनते थे, वहीं इस बार चार हजार मास्क प्रतिदिन बनाने की तैयारी हुई है। 120 महिलाओं को इसमें जोड़ा जा रहा है। चार केंद्रों पर मास्क बनाए जाएंगे। एनआरएलएम के अफसरों ने सीडीओ अनुनय झा को पूरी तैयारी से अवगत करा दिया है। 

इनका कहना है  

पिछले साल कोरोना संक्रमण में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने मास्क बनाने में बेहतर काम किया था। इस बार भी यह महिलाएं मास्क बनाने को पूरी तरह से तैयार हैं। शासन से आदेश मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। इससे बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा। 

अंकित खंडेलवाल, सीडीओ

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