जागरण संवाददाता, अलीगढ़ : स्वर्ण जयंती नगर विस्तार योजना में बनाए गए मकान और प्लॉट की जमीन अब किसानों को लौटानी पड़ेगी। हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई में एडीए (अलीगढ़ विकास प्राधिकरण) को हार मिली है। अदा त ने सीलिंग की करीब तीन हेक्टेयर जमीन को लौटाने का आदेश दिया है। इस जमीन के कुछ हिस्से में प्राधिकरण आवास बना चुका है तो कुछ में प्लॉट हैं। बुरी तरह से घिरे एडीए ने मामला सुलझाने के लिए कमेटी गठित की है।

10 साल पहले : गांव किशनपुर में पांच हेक्टेयर से अधिक जमीन सीलिंग की थी। करीब 10 साल पहले प्रशासन से यह जमीन मिली तो एडीए ने स्वर्ण जयंती नगर विस्तार योजना नाम की कॉलोनी तय कर दी। कुछ आवास बनाए, कुछ प्लॉट काटे। इस बीच, किसानों हाईकोर्ट पहुंचे व जमीन पर भौतिक कब्जा बताते हुए कहा कि बिना उनकी सहमति के कोई जमीन नहीं ले सकता।

किसानों के पक्ष में : हाईकोर्ट ने आधा दर्जन मामलों में किसानों के हक में फैसला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी एडीए को कह दिया कि हाईकोर्ट के फैसले पर अमल करें। अब एडीए को 33,458 वर्ग मीटर यानी तीन हेक्टेयर जमीन लौटानी होगी।

यह है जमीन : गाटा संख्या 353 की 3731 वर्ग मीटर, गाटा संख्या 342, 344, 347 की 10,000 वर्गमीटर, गाटा संख्या 354 की 4737, गाटा संख्या 305, 339 की 13,973 और गाटा संख्या 260 व 261 की 2950 वर्ग मीटर जमीन मुक्त की गई है।

दो इनसर्ट ही:: बने आवासों का क्या होगा?

गाटा संख्या 354 में आठ एमआइजी व सात एचआइजी श्रेणी के मकान बना दिए हैं। नौ व 12 मीटर चौड़ी सड़कें भी बनाई हैं। आवास का आवंटन भी हो चुका है। सवाल है कि पब्लिक का क्या होगा? क्या किसानों को एडीए अफसर जमीन देने को राजी कर पाएंगे? गाटा संख्या 342, 347, 344 पर 10 हजार वर्ग मीटर भूमि है। इसमें से 8067 वर्ग मीटर भूमि लौटानी होगी। बाकी के बारे में समझौता हो गया है।

----------- कमेटी का हुआ गठन

किसानों के साथ मिल-बैठकर मामला सुलझाने के लिए एडीए वीसी भावना श्रीवास्तव ने प्रभारी सचिव डीएस भदौरिया की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी गठित की है। इसमें सहायक नगर नियोजक केके बंसला, वित्त एवं लेखाधिकारी मोनिस अली सिद्दीकी व जेई सिराज अहमद हैं। कमेटी उन किसानों को खास तौरपर मनाने की कोशिश करेगी, जहां मकान बन चुके हैं। वो किसान चाहे पैसा ले लें या जमीन। इनका कहना है

स्वर्ण जयंती नगर विस्तार योजना की जमीन किसानों को लौटाने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया है। मैंने एक कमेटी बना दी है, जो किसानों से बात करके कोई हल निकालने की कोशिश करेगी।

भावना श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष एडीए

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Posted By: Jagran

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