अलीगढ़ : अधिकारियों की अनदेखी और दबंगों की मनमानी पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इससे शहर के अन्य भू माफियाओं में खलबली मच गई है। अवैध कब्जे के खिलाफ जिला प्रशासन ने एतिहासिक कार्रवाई की। दशकों से चल रहे छर्रा एवं गंगीरी बस अड्डे को बुलडोजर से मलबे में तब्दील कर दिया। दर्जनों दुकानें भी ध्वस्त कर दी गई हैं। यहां अतिक्रमणकारियों ने वक्फ बोर्ड की 72 करोड़ की 1.29 हेक्टेयर की सरकारी जमीन पर सालों से कब्जा जमा रखा था।

नौरंगाबाद जीटी रोड पुल के नीचे कोल तहसील की गाटा संख्या 1996 में कब्रिस्तान की भूमि दर्ज है। इसमें 1.17 हेक्टेअर नॉन जेडए व 582 वर्ग मीटर जेडए भूमि दर्ज है। नियमानुसार नॉन जेडए भूमि सरकारी होती है, जबकि जेडए भूमि प्राइवेट होती है। इसकी देखभाल के लिए मुतवल्ली तय है। पुल के नीचे की जमीन पर कब्जा कर दुकान भी बना लीं। छर्रा व गंगीरी बस स्टैंड का संचालन भी यहीं से शुरू कर दिया। पेट्रोल पंप खोल दिए गए। शिकायत के बाद इसकी जांच की गई। यहां जमीन की पूरी पैमाइश हुई। इसमें सामने आया कि नॉन जेडए जमीन पर फर्जी कब्जा किया गया है। मंगलवार को एसडीएम कोल ने यहां के लोगों को तहसील में बुलाया था। इस पर कुछ लोग तहसील भी गए, लेकिन उनके कागजातों में कोई दम नहीं था। ऐसे में दोपहर दो बजे के करीब एसडीएम कोल, एडीएम सिटी एसबी सिंह के साथ पुलिस, नगर निगम एवं आपूर्ति विभाग की टीम को लेकर मौके पर पहुंच गए। यहां ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। सबसे पहले छर्रा बस अड्डे पर बने सेक्यूलर ट्रेवल के ऑफिस को ध्वस्त किया, कर्मचारियों के लिए बनाए गए ऑफिस को भी तोड़ा गया। दुकानें भी तोड़ दी गई। पेट्रोल पंप के चारों तरफ गड्डे खोद दिए गए। इसी तरह गंगीरी बस अड्डे के ऑफिस एवं निर्माण को भी ध्वस्त कर दिया। पूरी कार्रवाई में दर्जन भर से अधिक दुकानें तोड़ी गई। जमीन कब्जा मुक्त होने के बाद अब नगर निगम की टीम ने अपना कब्जा कर लिया है। संपत्ति बोर्ड लगा दिया गया है, बाउंड्री शुरू कर दी गई है। इस दौरान एडीएम सिटी एसबी सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी नीरज सिंह, सीओ तृतीय संजीव दीक्षित, तहसीलदार गौतम सिंह, नगर निगम से कर अधीक्षक राजेश गुप्ता, अजीत राय आदि मौजूद रहे। कैसे मिली एनओसी, तहसील टीम भी जांच के घेरे में

वक्फ की जमीन पर बने पेट्रोल पंप को आपूर्ति विभाग की टीम ने सील कर दिया। पंप के दोनों तरफ से गड्डे खोद दिए हैं। इसके साथ ही पेट्रोल पंप स्वामी विष्णुपुरी निवासी प्रमोद कुमार गंगल को नोटिस जारी किया गया है। आपूर्ति विभाग के अफसरों की मानें तो इस पेट्रोल पंप की स्थापना 1957 में हुई थी। उस दौरान चंद पंप ही जिले में थे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि तहसील से उस दौरान पंप स्वामी को एनओसी कैसे मिल गई। इसकी भी जांच की जा रही है। तत्कालीन अफसर भी जांच के घेरे में हैं।

भवन स्वामी को 122बी के नोटिस

अस्थायी निर्माण को प्रशासन ने तोड़ दिया है, लेकिन स्थायी निर्माण को अभी नहीं गिराया है। प्रशासन ने इन भवन स्वामियों के खिलाफ 122 बी के नोटिस जारी कर दिए हैं। ऐसे में तहसीलदार कोर्ट में सुनवाई होगी। इसके बाद इसे भी ध्वस्त कर दिया जाएगा।

दम है तो मस्जिद तोड़े प्रशासन

प्रशासन की कार्रवाई के बाद स्थानीय महिलाओं ने हंगामा भी किया। आरोप था कि वह वक्फ बोर्ड को इसका किराया दे रहे हैं। इसके बाद भी दुकानें तोड़ी जा रही हैं। इसी जमीन पर एक मस्जिद भी हैं, अगर अफसर व प्रशासन में दम हैं तो वह इसे भी तोड़े। हालांकि महिला पुलिस ने उन्हें समझा-बुझाकर वापस कर दिया।

दर्ज होगा मुकदमा

कोल तहसील की टीम ने ध्वस्तीकरण के साथ अतिक्रमणकारियों को चिह्नित कर लिया है। एसडीएम अब इसकी विस्तृत रिपोर्ट बना रहे हैं। बुधवार को एक दर्जन के करीब लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की संभावना है। कार्रवाई में अफसरों के साथ ही चार थानों की पुलिस भी शामिल हुई। इसमें क्वार्सी, सिविल लाइन, गांधी पार्क एवं सिविल लाइन पुलिस शामिल थी।

सोशल मीडिया पर हुई प्रशंसा

प्रशासन की यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बन गई। कार्रवाई को देखने वालों की भीड़ लगी रही। लोग पुल के ऊपर से देखते रहे। सोशल मीडिया पर डीएम चंद्रभूषण सिंह की इस कार्रवाई की जमकर प्रशंसा की गई। लोगों ने कहा कि अब योगी सरकार में एतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं।

नगर निगम के हवाले की जमीन

जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह का कहना है कि पछले कई सालों से लोग बेशकीमती सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए हुए थे। अब यह जमीन कब्जा मुक्त कर नगर निगम के हवाले कर दी गई है।

Posted By: Jagran