जागरण संवाददाता, अलीगढ़ :

राष्ट्रीय राजमार्ग-91 (अलीगढ़-गाजियाबाद) व राष्ट्रीय राजमार्ग-93 (अलीगढ़-आगरा पर ) पर फर्राटा भरते वाहनों से टोल लेने वाली एजेंसियों को हर हाल में स्टांप शुल्क देना होगा। दोनों से 55 करोड़ रुपये के करीब वसूली होनी है। बीते दिनों कानूनी राय के बाद शासन स्तर पर आयोजित बैठक में यह फैसला लिया गया। डेढ़ साल पहले शासन ने स्टांप चोरी के मामले में वसूली पर रोक लगा दी थी।

ये था मामला : नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआइ) ने एनएच-91 बनाने के बाद जिले में दो स्थानों पर टोल प्लाजा का इकरारनामा किया। इसमें गभाना एवं मडराक टोल टैक्स शामिल हैं। इन दोनों स्थानों पर अलग-अलग एजेंसियों को टोल टैक्स वसूलने की जिम्मेदारी दी गई। दोनों कंपनियां स्टाप ड्यूटी की कमी के कारण विभाग के लपेटे में आ गई हैं। गभाना टोल टैक्स के लिए 24 साल के लिए टोल वसूली का अनुबंध हुआ। परफॉर्मेस सिक्योरिटी राशि भी राष्ट्रीय राजमार्ग-91 (गाजियाबाद-अलीगढ़ सेक्शन) को अदा की गई। स्टाप व निबंधन विभाग ने दावा किया था कि इस पर संबंधित कंपनी को स्टाप ड्यूटी भी अदा करनी चाहिए थी, परंतु की नहीं। जांच हुई तो 45 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी सामने आई। इसके अलावा मडराक टोल टैक्स प्लाजा की एजेंसी द्वारा भी स्टांप शुल्क जमा नहीं हुआ। यहां 10 करोड़ रुपये स्टांप चोरी सामने आई। यहां से शासन को शिकायत हुई। इसके अलावा डीएम कोर्ट में वाद दायर किया गया। इसमें टोल टैक्स की एजेंसियों ने दावा किया कि उन्हें टोल वसूलने का लाइसेंस मिला है। इधर शासन ने डेढ़ साल पहले वसूली पर रोक लगा दी। इसके अलावा मुख्य सचिव के निर्देश पर विधिक राय ली गई। अब शासन स्तर पर कानूनी राय की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बीते दिनों मुख्य एवं स्टांप एवं निबंधन विभाग के प्रमुख सचिव के बीच एक बैठक में भी हुई। इसमें टोल एजेंसी से पूरा स्टांप शुल्क वसूलने का फैसला लिया गया।

इनका कहना है..

शासन स्तर पर प्रमुख सचिव एवं मुख्य सचिव के बीच हुई बैठक में टोल एजेंसियों से स्टांप शुल्क वसूलने का फैसला लिया गया। हालंाकि अभी पत्र नहीं आया है। पत्र आते ही इसकी जानकारी डीएम को दे दी जाएगी।

- ज्ञानेंद्र कुमार, एआइजी

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Posted By: Jagran

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